राजनांदगांव। हर मुसलमान के लिए रमज़ान की ख़ास अहमियत होती है। इनमें दिनों के हिसाब से अक़ीदतमंद तीस या उनतीस दिनों तक रोज़े रख़ते है वहीं पहले और आखऱी रोज़े की ख़ास अहमियत होती है। इसी के चलते सँस्कारधानी नगरी राजनादगांव में सैय्यद फैमली से सैय्यद अफज़़ल अली के दोनों बच्चे सैय्यद तमरेज अली, औऱ सैय्यद आवेज़ अली ने भी ख़ुदा की ईबादत के लिए बड़े उत्साह के साथ रोजा रखा। औऱ देश मे औऱ दुनियावी इन्सानित में अमन चैन तथा करोना आपदा के ख़ात्मे की दुवा माँगी। नन्हें रोजादार बच्चों ने सिफऱ् रोज़ा ही नही बल्कि पांचों वक़्त की नमाज़ की पाबंदी भी की। सलामो कलाम, कुराने पाक, की तिलावत से घरों को मस्जिद जैसा ख़ुशनुमा बना दिया। कहते है रोज़े की नीयत में अल्लाह की रजा होती है । तभी तो छोटे छोटे बच्चे के चेहरे तपती दोपहरी के आलम में पन्द्रह घण्टे बिना कुछ खाना पानी के और खूबसूरत हो जाते है। नन्हें रोजेदारों के परिजनों ने नन्हें रोजेदारों की उत्साह के साथ हौसलाफजाई की। शहर के उलेमाओं ने नन्हें रोज़ेदारों की सराहना करतें हुये कहा कि माहे रमज़ान में तीन असरे होते है। पहला अशरा रहमत का होता है, दूसरा अशरा मग़फिऱत यानी गुनाहों की माफ़ी का होता है, औऱ तीसरा अशरा जहन्नुम की आग से ख़ुद को बचाने के लिए होता है। रमज़ान के महीने को लेकर एक किताब में हजऱत पैग़म्बर मोहहमद ने कहा है, रमज़ान की शुरूआत में रहमत है, बीच मे मग़फिऱत यानी माफ़ी है, औऱ इसके अंत मे जहन्नुम की आग से बचाव है। पूरे शहर जिले के नन्हें मुस्लिम बच्चों ने लॉकडाउन के दिनों में अपने परिजनों के साथ ख़ुदा की ईबादत की। शहर के सभी रोजदार बच्चों औऱ उनके परिजनों के दिनी ज़ज़्बे को सलाम।
