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Online Gaming Bill 2025: लोकसभा में पारित हुआ ऑनलाइन मनी गेम्स पर बैन का बिल, 3 साल की सजा और 1 करोड़ तक जुर्माना

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Online Gaming Bill 2025

Online Gaming Bill 2025: लोकसभा में पारित हुआ ऑनलाइन मनी गेम्स पर बैन का बिल, 3 साल की सजा और 1 करोड़ तक जुर्माना लोकसभा ने बुधवार को ऑनलाइन मनी गेम्स पर रोक लगाने वाला अहम विधेयक पारित कर दिया। इसका मकसद ऑनलाइन गेम्स की लत, वित्तीय धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग जैसी बढ़ती समस्याओं पर रोक लगाना है।

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ऑनलाइन गेमिंग संवर्धन और विनियमन विधेयक, 2025 के तहत –

  1. ऑनलाइन मनी गेम्स से जुड़े विज्ञापनों पर पूरी तरह प्रतिबंध होगा।
  2. बैंक और वित्तीय संस्थान ऐसे किसी भी गेम को फंडिंग या ट्रांजैक्शन की सुविधा नहीं देंगे।
  3. कानून तोड़ने वालों को 3 साल तक की कैद और/या 1 करोड़ रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।

किन गेम्स पर लगेगा बैन?

विधेयक के पारित होने के बाद –

  1. सभी ऑनलाइन सट्टेबाजी और जुआ गैरकानूनी होंगे।
  2. इसमें ऑनलाइन फैंटेसी गेम्स, पोकर, रम्मी, कार्ड गेम्स और ऑनलाइन लॉटरी भी शामिल हैं।
  3. वहीं, ई-स्पोर्ट्स और सोशल गेम्स (जैसे शतरंज, सॉलिटेयर, सुडोकू) पर कोई पाबंदी नहीं होगी, क्योंकि इन्हें मनोरंजन और शिक्षा की श्रेणी में रखा गया है।

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आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने क्या कहा?

विधेयक पेश करते हुए केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा – “जब समाज, मध्यम वर्ग और सरकारी राजस्व की बात आती है, तो सरकार हमेशा समाज के हित को प्राथमिकता देती है। ऑनलाइन मनी गेम्स की वजह से कई परिवार बर्बाद हो गए हैं, कई लोग आत्महत्या तक कर चुके हैं। इसलिए इस बिल को लाना जरूरी था।”

उन्होंने आगे समझाया कि –

  1. ई-स्पोर्ट्स खेल रणनीति, टीमवर्क और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देते हैं।
  2. सोशल गेम्स जैसे शतरंज और सुडोकू मनोरंजक व शैक्षणिक हैं।
  3. लेकिन ऑनलाइन मनी गेम्स समाज में खतरे की तरह फैल रहे हैं। इनके एल्गोरिदम अपारदर्शी होते हैं और खिलाड़ी को नहीं पता चलता कि वह किसके खिलाफ खेल रहा है।

विपक्ष का विरोध

बिल पास करते समय विपक्षी सदस्य लगातार नारेबाजी करते रहे। इसके बावजूद विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया और इसके बाद लोकसभा की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई।

निष्कर्ष

इस बिल के कानून बनने के बाद भारत में ऑनलाइन जुआ और सट्टेबाजी पूरी तरह गैरकानूनी हो जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे न सिर्फ समाज को नुकसान से बचाया जा सकेगा, बल्कि युवाओं को भी लत और धोखाधड़ी से दूर रखा जाएगा।

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