डिलीवरी बॉय से बने डिप्टी कलेक्टर: JPSC में सूरज यादव की सफलता की कहानी झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) ने 25 जुलाई को संयुक्त सिविल सेवा मुख्य परीक्षा 2023 का परिणाम घोषित किया। इस रिजल्ट में गिरिडीह के सूरज यादव ने शानदार सफलता हासिल की और अब वह डिप्टी कलेक्टर बनेंगे। सूरज की कहानी उन युवाओं के लिए मिसाल है जो कठिन परिस्थितियों से जूझते हुए भी हार नहीं मानते। पढ़ाई का खर्च निकालने के लिए उन्होंने स्विगी में डिलीवरी बॉय और रैपिडो बाइक टैक्सी का काम किया, लेकिन मेहनत और जुनून से अपने सपनों को हकीकत में बदल दिया।
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मजदूर पिता के बेटे ने लिखी नई इबारत
सूरज यादव एक साधारण परिवार से आते हैं। उनके पिता राजमिस्त्री का काम करते हैं और घर की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर रही। इसके बावजूद सूरज ने कभी अपना सपना नहीं छोड़ा। उन्होंने रांची में रहकर सिविल सेवा की तैयारी शुरू की। जब घर से पैसे मिलना बंद हो गए तो सूरज ने डिलीवरी बॉय का काम शुरू किया ताकि पढ़ाई का खर्च उठा सकें।
दोस्तों ने खरीदी पुरानी बाइक
पढ़ाई और काम के लिए सूरज को बाइक की जरूरत थी, लेकिन पैसे नहीं थे। ऐसे में उनके दोस्तों राजेश नायक और संदीप मंडल ने मदद की। दोनों ने अपनी स्कॉलरशिप के पैसों से सूरज को एक पुरानी बाइक दिलाई। यही बाइक सूरज की साथी बनी। वह दिन में करीब 5 घंटे डिलीवरी का काम करते और बाकी समय पढ़ाई में लगाते।
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परिवार और पत्नी का साथ बना हौसला
सूरज की सफलता में उनके परिवार का बड़ा योगदान रहा।
- पिता ने मजदूरी करके बच्चों का हौसला बढ़ाया।
- बहन ने घर की जिम्मेदारियां संभाल लीं ताकि सूरज पढ़ाई पर ध्यान दे सकें।
- पत्नी हर समय सूरज का हौसला बढ़ाती रहीं और मुश्किल समय में उन्हें मानसिक सहारा देती रहीं।
यही पारिवारिक सहयोग सूरज की सफलता की असली ताकत बना।
इंटरव्यू में सुनाई अपनी संघर्ष गाथा
JPSC परीक्षा में सूरज यादव की रैंक 110वीं आई। जब वह इंटरव्यू देने पहुंचे और बोर्ड को बताया कि वह डिलीवरी बॉय का काम करते हैं, तो सभी हैरान रह गए। लेकिन सूरज ने आत्मविश्वास के साथ डिलीवरी जॉब से जुड़े तकनीकी सवालों के जवाब दिए। उनकी सच्चाई और आत्मविश्वास ने ही उन्हें सफलता दिलाई। यह उनका दूसरा प्रयास था और इस बार उन्होंने मंज़िल पा ली।
निष्कर्ष
सूरज यादव की कहानी यह साबित करती है कि हालात चाहे कितने भी मुश्किल हों, मेहनत, धैर्य और परिवार के सहयोग से सपनों को हकीकत बनाया जा सकता है। डिलीवरी बॉय से डिप्टी कलेक्टर तक का उनका सफर युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।






