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चैत्र नवरात्र की शुरुआत दो अप्रैल से होगी। नवरात्र को लेकर मां बम्लेश्वरी मंदिर में तैयारी युद्ध स्तर पर जारी है। मंदिरों को संजाने-संवारने का काम अंतिम दौर में है। 1100 सीढ़ियां चढ़कर भक्त मां बम्लेश्वरी का दर्शन करने ऊपर मंदिर पहुंचेगे। पहाड़ी वाले रास्ते में प्रसाद की दुकानें सजकर तैयार हो गई है। चैत्र नवरात्र को लेकर भक्तों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। कोरोना संक्रमण कम होने के बाद इस बार श्रद्धालु आसानी से मां बम्लेश्वरी का दर्शन कर सकेंगे। नवरात्र में आस्था का सैलाब उमड़ेगा। 1600 मीटर ऊंची पहाड़ी में विराजित मां बम्लेश्वरी के दरबार में पहुंचने भक्त 1100 सीढ़ियां चढ़ेंगे। कोरोना गाइड लाइन का पालन करते हुए श्रद्धालुओं को माता का दर्शन कराया जाएगा। वहीं आनलाइन दर्शन की भी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएगी। नवरात्रि मेला को लेकर प्रशासन तैयारी में जुट गई है। इधर, पहाड़ में प्रसादों की दुकानें सज गई हैं।
2 अप्रैल से शुरू होगा चैत्र नवरात्रि
मंदिर ट्रस्ट के लोगों ने बताया कि 2 अप्रैल को ज्योति कलश प्रज्ज्वलित किए जाएंगे. 6 अप्रैल को पंचमी पर माता का विशेष शृंगार होगा. 8 अप्रैल सप्तमी पर विशेष कालरात्रि अभिषेक. 9 अप्रैल अष्टमी हवन और 10 अप्रैल को ज्योति कलशों का विसर्जन महावीर तालाब में किया जाएगा. मंदिर के ऊपर में 6001, नीचे मंदिर में 801 व शीतला मंदिर में 51 ज्योति कलश प्रज्जवलित होंगे. ऊपर मंदिर में 1101 रुपए व नीचे मंदिर में 2100 रुपए देकर श्रद्धालु ज्योति कलश प्रज्ज्वलित करा सकते हैं.

दूर-दूर से पैदल पहुंचते हैं श्रद्धालु
गौरतलब है कि, डोंगरगढ़ स्थित मां बम्लेश्वरी के दर्शन करने के लिए चैत्र नवरात्रि में दूर-दूर से श्रद्धालु पैदल ही मंदिर पहुंचते हैं. इस बार गर्मी का भी व्यापक असर देखने को मिल रहा है जिसे देखते हुए जगह-जगह निजी संस्थाओं व प्रशासन की तरफ से पानी और खाने की व्यवस्था पंडाल लगाकर की जाएगी. यात्रा के दौरान पदयात्री कुछ देर के लिए इन पंडालों में आराम कर आगे की यात्रा शुरू कर सकेंगें.
दुकानदारों को मिलेगी आर्थिक राहत
नवरात्र में मंदिर में दर्शनार्थी माता के दर्शन के लिए पहुंचेंगे। श्रद्धालुओं इस बार आसानी से माता का दर्शन कर सकेंगे। बीते दो सालों से कोरोना के चलते पाबंदियां लगाई गई थी। जिसके चलते श्रद्धालु दर्शन करने नहीं आ पा रहे थे। जिसकी वजह से दुकानदार भी अपनी दुकानदारी में मुनाफा कम कमा पाए थे। मां बम्लेश्वरी मंदिर के परिसर के आसपास सहित ऊपर मां बमलेश्वरी की पहाड़ियों पर भी दुकानें हैं।लाकडाउन में दुकानदारों ने अपनी दुकानें बंद रखी थी। जिसके कारण कई दुकानदारों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ा था। पर इस बार मेला लगने के कारण आर्थिक राहत तो मिलेगी। ऐसे भी कई दुकानदार है जो साल में लगने वाले दो मेलों में ही अपनी दुकानदारी कर साल भर का खर्चा निकाल लेते है पर कोरोना के चल मेला नहीं लगने के कारण इन दुकानदारों को भी आर्थिक परेशानी से गुजर ना पड़ा था। इस बार अनुमान लगाया जा रहा है कि माता के दर्शन के लिए दर्शनार्थी अधिक पहुंचेंगे।
कोरोना की वजह से ट्रेने स्थाई नहीं
ट्रेनों का परिचालन अब तक स्थाई नहीं है. पर्व के दौरान स्पेशल ट्रेनों के चलाए जाने पर भी सस्पेंस बरकरार है. कोरोना काल के चलते रेलवे ने अब तक यात्री गाड़ियों के परिचालन को स्थाई नहीं किया है. अभी भी कई लोकल व पैसेंजर ट्रेनें नियमित नहीं चल रही हैं. परिचालन नियमित नहीं होने से यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. परिचालन स्थाई नहीं होने की वजह से पर्व के दौरान स्पेशल ट्रेनें चलेंगी या नहीं इस पर अभी तक सस्पेंस बना हुआ है.
ट्रैफिक व्यवस्था पर देना होगा ध्यान
2 दो साल बाद लगने वाले मेले की वजह से ट्रैफिक व पार्किंग व्यवस्था प्रशासन के लिए चुनौती साबित होगी. क्योंकि अंडरब्रिज निर्माण के बाद वाहनों की आवाजाही सतबहिनी मंदिर मार्ग से हो रही है. इसी मार्ग को दर्शनार्थी भी उपयोग करेंगे. ट्रफिक जाम लगने की पूरी आशंका है. पार्किंग व्यवस्था के लिए भी प्रशासन को मशक्कत करनी पड़ेगी. गौशाला पार्किंग, टूरिस्ट लॉज ग्राउंड व गुरुद्वारा कमेटी ग्राउंड में वाहनों को पार्क किया जाएगा.
