० आज मनाया जाएगा उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोग दिवस
राजनांदगांव। उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोग (नेगलेक्टेड ट्रापिकल डिसीज या एनटीडी) पर नियंत्रण के लिए जिले में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। फाइलेरिया, डेंगू, मलेरिया, कुष्ठ व कृमि जैसे रोगों से बचाव हेतु लोगों को जागरुक करने के लिए विभिन्न कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। इसी क्रम में फाइलेरिया रोग उन्मूलन के लिए इन दिनों जिले में नाईट ब्लड सर्वे किया जा रहा है जिसमें अब तक लक्ष्य के लगभग 50 प्रतिशत लोगों का सैंपल कलेक्शन किया जा चुका है।
फाइलेरिया रोग उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत जिले में सघन सर्वे अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत संवेदनशील गांवों में फाइलेरिया के लक्षणों वाले रोगियों को चिन्हित किया जा रहा है। इस दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा लोगों से अपील भी की जा रही है कि फाइलेरिया के लक्षण होने पर इस रोग को छिपाएं नहीं बल्कि इलाज कराएं। इलाज कराने से फाइलेरिया का समय रहते इलाज किया जा सकता है।
फाइलेरिया रोग के प्रसार के मद्देनजर संवेदनशील 4 सेंटिनल और 4 रेंडम साइट सहित कुल 8 क्षेत्रों में नाईट ब्लड सर्वे किया जा रहा है तथा प्रत्येक साइट पर 500 सैंपल कलेक्शन का लक्ष्य रखा गया है। सर्वे में किसी व्यक्ति को फाइलेरिया पॉजिटिव पाए जाने की स्थिति में उसका समुचित उपचार करने का प्रयास किया जाएगा। इससे पहले भी फाइलेरिया उन्मूलन का प्रयास करते हुए जिले में फाइलेरिया के सभी पुराने मरीजों को फाइलेरिया किट वितरित किया गया है। साथ ही पीड़ितों को फाइलेरिया किट के उपयोग एवं रोग व विकृति के कारण आने वाली अपंगता की रोकथाम तथा प्रबंधन की जानकारी भी दी जा रही है। ऐसे ही प्रयासों की सार्थकता के लिए हर साल 30 जनवरी को विश्व उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोग दिवस मनाया जाता है।
इस संबंध में मलेरिया विभाग की जिला सलाहकार संगीता पांडेय ने बताया-उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में होने वाले संक्रमणों को उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोग (नेगलेक्टेड ट्रॉपिकल डिसीज.एनटीडी) कहते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा विश्व स्तर पर 20 एनटीडी को मान्यता दी गई है। इन 20 एनटीडी में से 12 भारत में भी मौजूद हैं। एशिया के विकासशील क्षेत्रों के कम आयवर्ग की आबादी में विशेष रूप से यह रोग पाया जाता है। इन्हें उपेक्षित इसलिए कहा जाता है क्योंकि इनका इलाज या तो बहुत महंगा है या गरीब क्षेत्रों में उपलब्ध ही नहीं है। इन रोगों के प्रति लोगो को जागरूक करने के लिए ही प्रति वर्ष 30 जनवरी को उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोग दिवस मनाया जाता है। एनटीडी रोग नियंत्रण की कड़ी में स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा फाइलेरिया संभावित क्षेत्र में वर्तमान में रात्रि 8.30 बजे से रात्रि 12 बजे तक नाईट ब्लड सर्वे किया जा रहा है। इसके अंतर्गत 2 वर्ष से अधिक आयु के सभी व्यक्तियों का रक्त पट्टी संग्रहण किया जा रहा है। इसके पश्चात फाइलेरिया पॉजिटिव पाए जाने की स्थिति में पीड़ित को चिकित्सा अधिकारी की सलाह पर फाइलेरिया के प्रारंभिक उपचार हेतु गोली खिलाई जाएगी तथा चिकित्सा अधिकारी द्वारा फाइलेरिया के समुचित उपचार का प्रयास किया जाएगा।
इस बारे में बात करते हुए राजनांदगांव के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डा. मिथिलेश चौधरी ने बताया-एनटीडी के प्रति लोगों को जागरूक करना बहुत जरूरी है। एनटीडी कई प्रकार के रोग जनकों, जैसे-वायरस, बैक्टीरिया, प्रोटोजोआ और परजीवियों द्वारा संचरित होते हैं। इन रोगों में काला अजार, डेंगू, चिकनगुनिया, रेबीज, अल्सर, कुष्ठ रोग, खाज व सर्पदंश आदि प्रमुख हैं। जिले में मुख्य रूप से डेंगू, फाइलेरिया, मलेरिया, कुष्ठ, कृमि रोग आदि से लोग ज्यादा प्रभावित होते हैं। इन रोगों से बचाव के लिए जिले में विभिन्न स्वास्थ्य कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को जागरुक करने का प्रयास किया जा रहा है।
