राजनांदगांव 18 जनवरी। जैन मुनि शौर्य रतन सागर ने कहा कि पक्षी भी अपनी मान्यताओं एवं उसूलों के लिए प्राण की बाजी लगा देता है, फिर आप तो मानव हैं। आप अपने संस्कारों को – उसूलों को क्यों त्याग देते हो। अनीति से कमाए हुए दूध भात से अच्छा है,नीति से कमाए हुए पैसे से सूखी रोटी खाना।
मुनिश्री ने कहा कि मां की ममता और प्रभु की समता एक समान होती है। उन्होंने कहा कि विषम परिस्थितियों में भी अपने संस्कारों और उसूलों से पीछे नहीं हटना चाहिए। उन्होंने कहा कि ज्ञानियों ने मानव जीवन को श्रेष्ठ कहा है। मानव जीवन इसलिए श्रेष्ठ होता है कि मनुष्य जन्म लेता है मानव रूप में लेकिन वह अपने पुरुषार्थ के जरिए महामानव और परम तत्व को प्राप्त कर परमात्मा बन सकता है किंतु अन्य जीव ऐसा नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि हमारा इतिहास स्वर्णिम रहा है और आज हम कहां आ खड़े हुए हैं। लोग ठंडी चाय मिलती तो भड़क जाते हैं किंतु यह नहीं सोचते हैं कि कितने लोग ठंड से ठिठुरते रहे हैं।
मुनिश्री ने कहा कि यह जो भव है बड़ी मुश्किल से मिला है। इसे परमात्मा बनाने में लगाओ, आत्म कल्याण करो । हम अपने स्वार्थ पूर्ति के लिए हर प्रकार की अनीति का उपयोग करते हैं। हममें और पशु में क्या फर्क है। वह सूअर जो गटर में रहकर उसे ही स्वर्ग बन रहा है और ठीक उसके ऊपर ठेले वाले से हम फूलके खा रहे हैं और आनंद का अनुभव कर रहे हैं। जो मातृत्व आंचल में छुपा लेने का है उसे हम फेसबुक में अपलोड कर रहे हैं। सास ससुर और सभी से देख रहे हैं। हममें और कुत्ते में क्या फर्क रह गया है वह भी तो अपने सारे कार्य सरेराह कर रहे हैं। कल मैं 30 साल का था और आज 31 साल का हो रहा हूं इसमें मैं खुशी मनाऊं या गम कि मेरा अतीत बढ़ रहा है और मेरा भविष्य कम हो रहा है।
अभाव में भी जीना सीखिए – अभिषेक मुनि
जैन संत अभिषेक महाराज ने कहा कि पुरुषार्थ की जब बात होती है तब हम पीछे हट जाते हैं। प्रवचन सुनते हैं किंतु उसे आचरण में नहीं डालते। मनुष्य जीवन आपको परमात्मा से उपहार मिला है। यह मानव जीवन पुरुषार्थ कर महामानव बनने का है। हमें अभाव में भी जीना सीखना है। साधु – साध्वियां अपेक्षाओं से परे रहते हैं। पहले के लोग टीवी मोबाइल के बिना भी रह लेते थे किंतु अब इसके बिना जीना मुश्किल हो गया है। उन्होंने कहा कि सारी सुविधाओं के बावजूद भी हम सुखी नहीं है जबकि साधु संत अभाव जीवन जीने के बाद भी सुखी हैं। इसलिए अभाव का जीवन जीते हुए सुखी रहना सीखिए।
