प्रीति श्रीश्रीमाल ब्यावर में 10 फरवरी को लेगी जैन दीक्षा
राजनांदगांव :- संस्कारधानी नगरी राजनांदगांव के गौरवशाली इतिहास में एक कड़ी और जुड़ने जा रही है नगर में पली-बढ़ी सुराणा परिवार की बेटी श्रीमती प्रीति धर्मपत्नी स्वर्गीय विकास जी श्री श्री माल रायपुर आचार्य श्री नानेश के बगिया के फूल बनने जा रही हैं वे दिनांक 10 फरवरी 2022 को ब्यावर ( राजस्थान ) में 6 अन्य मुमुक्षुओं के साथ श्री साधुमार्गीय शांत क्रांति जैन संघ के आचार्य, विश्व वल्लभ, प्रज्ञानिधि 1008 श्री विजय राज जी म.सा. के मुखारविंद से संयम अंगीकार करने जा रही है इस अवसर पर श्रमणश्रेष्ठ श्री शांतिमुनिजी म.सा. सहित अनेकों साधु साध्वियाँ प्रत्यक्ष आशीर्वाद प्रदान करेंगे ।
श्री साधुमार्गीय शांतक्रांति जैन श्रावक संघ राजनांदगांव के अध्यक्ष श्री संतोष जैन सावा एवं महामंत्री श्री संजय छाजेड़ ने बताया कि प्रिती श्रीश्रीमाल के श्वसुर अखिल भारतीय साधुमार्गीय शांतक्रांति जैन श्रावक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री प्रकाशचंद जी श्रीश्रीमाल व राजनांदगांव के सक्रिय युवा कार्यकर्ता तथा प्रिती श्रीश्रीमाल के भाई रेखचंद जैन ने किशनगढ़ राजस्थान में 1 जनवरी 2022 शनिवार को अपने परिजनों के साथ आचार्य श्री की सेवा में पहुंचकर परिवार की ओर से दीक्षा आज्ञा पत्र समर्पित किया।
उल्लेखनीय है कि प्रिती श्रीश्रीमाल का जन्म बालोद जिले के गांव संजारी में 11 नवंबर 1980 को हुआ *शिक्षा का प्रारंभ राजनांदगांव के जैन बाल मंदिर सदर बाजार से हुआ तत्पश्चात महारानी लक्ष्मीबाई कन्या शाला में अध्ययन की फिर शासकीय दिग्विजय कॉलेज में स्नातक की शिक्षा पूर्ण की* , साथ ही परिवार के धार्मिक वातावरण में रहते हुए समता बालिका मंडल व अन्य संस्थाओं के माध्यम से अपनी धार्मिक गतिविधियों को आगे बढ़ाया। उनके परिवार से पिताजी स्व. श्री इंद्र मुनि जी म.सा. माता जी स्व.श्री गरिमा श्री जी म.सा. ने भी संयम अंगीकार किया था। वर्तमान में बड़ी बहन आशु कवियित्री विदुषी महासती श्री उज्जवल प्रभाजी म.सा. महासती जी श्री कामना श्री जी म.सा. व ससुराल पक्ष में उनके नंदोई श्री निश्चल मुनि जी म.सा. भी संयम जीवन में रहकर जिनशासन की शोभा बढ़ा रहे हैं।
सन 2015 में शांतक्रान्ति जैन संघ के महासती श्री राजश्री जी म.सा. के सानिध्य में पूज्य सत्यप्रभा जी म.सा. का चातुर्मास देवेंद्र नगर रायपुर में हुआ उनके संपर्क से वैराग्य की भावना जागृत हुई तथा पिछले वर्ष पति श्री विकासजी श्रीश्रीमाल का असमय निधन होने पर जीवन की नश्वरता का करीब से साक्षात्कार हुआ जिससे वैराग्य की भावना और प्रबल हुई व दोनों पुत्रों 19 वर्षीय श्रेयांस व 14 वर्षीय अनंत के साथ ही परिजनों के मोह के बंधन को तोड़ कर वीर पथ पर आगे बढ़ रही है।
प्रिती श्रीश्रीमाल ने विभिन्न छोटी तपस्याओं के साथ ही सन 2012 व सन 2018 में दो बार मासक्षमण जैसे कठिन तप की आराधना कर चुकी है जो कि उनके दृढ़ मनोबल का परिचायक है।
सकल जैन श्री संघ राजनांदगांव के अध्यक्ष श्री नरेश डाकलिया ने प्रिती श्रीश्रीमाल के इस निर्णय की अनुमोदना करते हुए उन्हें आशीर्वाद प्रदान किया है और उनके उज्जवल भविष्य की कामना की है।
