तेरह दिवसीय संत समागम का आज होगा शुभारंभ
श्री जलाराम राम मंदिर में आयोजित होगा महोत्सव
एक शाम हनुमान के नाम करने का आव्हान
राजनांदगांव । श्री श्याम के दीवानों एवं श्री हनुमान भक्तों के द्वारा देशभर में श्री सुंदरकांड के पाठ वर्ष 2015 से प्रारंभ किया गया । वर्तमान में 1295 श्री सुंदरकांड के पाठ संपन्न हो चुके हैं , 12वीं माला की पूर्णाहुति (1296 वा ) सुंदरकांड पाठ को यादगार बनाने के उपलक्ष में 1 जनवरी 2022 से 13 दिवसीय संत समागम एवं श्री सुंदरकांड महोत्सव का आयोजन श्री जलाराम राम मंदिर के प्रांगण में संपन्न होने जा रहा है । 12वीं माला की पूर्णाहुति 9 जनवरी को 108 जोड़ों के द्वारा सामूहिक रूप से की जावेगी । इस भव्य महोत्सव का शुभारंभ आज 1 जनवरी 2022 शनिवार को देश के सुप्रसिद्ध हनुमंत सेवक पंडित विजय शंकर जी मेहता के द्वारा ” एक शाम हनुमान के नाम ” के अंतर्गत ” हमारे हनुमान ” विषय की विवेचना करते हुए किया जावेगा । ज्ञातव्य है कि पंडित विजय शंकर जी मेहता ने भक्त शिरोमणि हनुमान जी के संदर्भ में गहन अध्ययन करते हुए पूरे विश्व में श्री हनुमान चालीसा के पाठ का कीर्तिमान स्थापित किया है । श्री श्याम के दीवाने एवं हनुमान भक्त गणेश मिश्रा , राजेश शर्मा , दीपक अग्रवाल , श्याम सुंदर लोहिया , राजू शर्मा , संदीप मिश्रा द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार इस 13 दिवस में देश – विदेश में ख्याति प्राप्त अनेक संत – महात्माओं का आगमन संस्कारधानी नगरी में होगा । यह महोत्सव अपने आप में इस नगर , अंचल एवम प्रदेश के लिए अनूठा होगा जो लगातार 13 दिवस तक प्रतिदिन अलग – अलग संत महात्माओं के द्वारा श्री सुंदरकांड पाठ , श्री श्याम भजन के लिए प्रसिद्ध होगा । श्री श्रीमद् भागवत कथा 1 सप्ताह , श्री राम चरित्र मानस पाठ 10 दिवसीय आयोजित होते हैं । जिसमें एक ही संत – महात्मा व्यासपीठ पर विराजमान हुआ करते हैं , किंतु इस श्री सुंदरकांड महोत्सव में 13 दिवस में 12 संत महात्मा व्यास गद्दी पर विराजमान होंगे । यह एक अद्भुत आयोजन होगा । श्री जलाराम राम मंदिर प्रांगण में प्रतिदिन शाम 5:31 बजे से महोत्सव प्रारंभ होंगे । इस आयोजन के मुख्य यजमान श्रीमती सावित्री देवी दामोदरदास मुंदड़ा परिवार है ।आयोजन समिति ने अंचल के भक्त माताओं – बहनों एवं बंधुओं से आग्रह किया है कि समय पूर्व महोत्सव स्थल पर पहुंचकर अपना स्थान सुरक्षित कर लेवे , जिससे हमारे हनुमान विषय को समुचित रूप से समझने के अवसर से वंचित ना होना पड़े ।
