ट्विनसिटी में नशीली दवाओं का धड़ल्ले से उपयोग हो रहा। ये दवाएं कहां से और कैसे पहुंच रही, इसकी कहीं किसी को भनक तक नहीं लग पा रही। रविवार को पुलिस ने तीन लोगों से तीन बोरियों में करीब 10 लाख नशीली प्रतिबंधित दवाओं के टेबलेट्स जब्त किए हैं। इसके अलावा 10 पेटी कफ सीरप की बोतलें जब्त की गई है। इसकी कीमत 15 लाख से अधिक बताई गई है।
गिरोह के तार दुर्ग थाना अंतर्गत मिलपारा से जुड़े हैं। पुलिस ने शनिवार को सबसे पहले अप्पू नाम के युवक को पकड़ा। इसके बाद उसके गिरोह में शामिल साथी की निशानदेही पर धमतरी के तस्कर को पकड़ा गया। पुलिस की एक टीम तीनों की निशानदेही पर देर रात अलग अलग गोदाम में छापामार कार्रवाई की। बहरहाल पुलिस की जांच देर रात तक जारी रही। प्राथमिक पूछताछ से स्पष्ट हुआ है कि तीनों मेडिकल स्टोर और दवाई फैक्ट्री से प्रतिबंधित दवाएं खरीदकर मार्केट में खपाते थे। तीनों के संपर्क में कई एजेंट भी हैं।
धमतरी से बड़ी मात्रा में नशीली दवा खरीदकर शहर में खपा रहे
पुलिस पूछताछ में पता चला है कि अप्पू अपने साथी के साथ धमतरी से प्रतिबंधित दवाएं खरीदकर लाता था। इसके बाद एजेंटों के माध्यम से प्रतिबंधित टेबलेट और सीरप को खपा रहे थे। इसके पहले नेवई, खुर्सीपार और सुपेला पुलिस मेडिकल स्टोर संचालकों को भी प्रतिबंधित दवाएं बेचने के मामले में पकड़ चुकी है।
तीनों मेडिकल स्टोर और अपने घर से प्रतिबंधित दवाएं बेचते थे। तीनों से पुलिस ने बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित टेबलेट जब्त किए गए थे। जिसके बाद पता चला था कि मेडिकल स्टोर संचालकों को आसानी से प्रतिबंधित दवाएं उपलब्ध हो जाती है। इन प्रतिबंधित दवाईयों को मेडिकल स्टोर संचालक बिना पर्ची के बेचते हैं। इसकी भी पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
धमतरी से लाकर खपाया जा रहा था, पुलिस की जांच देर रात तक जारी रही, जल्द बड़े खुलासे
ढाई हजार से अधिक सीरप और 10 हजार से ज्यादा टेबलेट जब्त
पुलिस ने पिछले छह महीने कार्रवाई करके ढाई हजार से अधिक सीरप की बोतल और 10 हजार से ज्यादा प्रतिबंधित टेबलेट जब्त कर चुकी है। सभी कार्रवाई में यह स्पष्ट हुआ था कि नशे का कारोबार करने वाले मेडिकल स्टोर से प्रतिबंधित दवाइयां खरीदकर दो गुना दामों में नशेड़ियों को बेचते है।
पुलिस ने तस्करों से मिली जानकारी के मुताबिक ड्रग डिपार्टमेंट को मेडिकल स्टोर संचालकों के खिलाफ कार्रवाई के लिए पत्र भी लिखा था। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक सीधे तौर पर मेडिकल स्टोर की छानबीन करने का अधिकारी ड्रग डिपार्टमेंट को रहता है। जबकि नशीली दवाइयां बेचते हुए पकड़ने पर तस्कर के खिलाफ एनडीपीएस के तहत केस दर्ज किया जाता है। पहले भी दवाएं जब्त की जा चुकी है।
