छत्तीसगढ़ में किसान पुत्र, थूंक और ब्राह्मण जैसे मुद्दे को लेकर सियासी पारा गर्म है तो वहीं अब दुर्ग सांसद विजय बघेल ने अपना बयान जारी किया है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम को अपमानित करने वाले का बेटा कभी किसान नहीं हो सकता। यहां इतना अधिक जनआक्रोश, नाराजगी है कि आक्रोश में सभ्य, सुसंस्कृत, सुशील व सरल महिला के मुंह से भी राज्य सरकार के खिलाफ अनुचित शब्द निकल जाते है। वह थूंक नही फूंक के ताकत की बात है। भाजपा का एक-एक कार्यकर्ता मिलकर फूंक मारेगा तो प्रदेश की अहंकारी सरकार निश्चित रूप से ताश के पत्ते की तरह ढह जायेगी।
प्रदेश प्रभारी के बचाव में सांसद
दुर्ग सांसद विजय बघेल भाजपा की प्रदेश प्रभारी के बचाव में मैदान में कूद चुके है। उन्होंने कहा कि डी. पुरंदेषश्वरी दीदी महान भारतीय परम्पराओं व संस्कृति को मानने वाले सभ्य परिवार की सुसंस्कृत सुशील महिला है। उनके पिता एन.टी. रामाराव अपने व्यवहार कुशलता, सद्भावना और सभी को साथ लेकर चलने की बेहतरीन क्षमता से इतने लोकप्रिय रहे है कि उन्हे वहां भगवान की तरह पूजा जाता रहा है। हॉलाकि, दीदी कहना कुछ चाहती थी। लेकिन दक्षिण भारतीय होने की वजह से शब्दों के फर्क से कुछ निकल गया। बेतुकी बयानबाजी करने के बजाय ऐसी सरल सहज व सुसंस्कृत पारम्परिक भारतीय महिला की बातों का अर्थ का अनर्थ करने के बजाय उनके भावनाओं को समझना चाहिए। छत्तीसगढ़ सरकार को इसे समझते हुए अपनी गलतियों को सुधारना चाहिए।
किसान परेशान
किसान पुत्र की बात को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि कर्ज माफी की नौटंकी से भी किसानों और सहकारी बैंकों को भी नुकसान हुआ है। किसानों को नकली खाद, बीज और रासायनिक खाद की कमी की समस्या से लगातार जुझना पड़ रहा है। हर जगह ऐसा लगता है कि यह सब सरकार के संरक्षण में चल रहा है। नकली बीज मिलने से खेतों में फसल खड़ी ही नहीं हुई । बैंकों को कर्ज माफी के करोड़ों रूपए वापस नहीं मिले है। जिससे उनकी आर्थिक स्थिति खराब हो रही है। धान का उठाव करने में भारी देरी की गई। जिससे सोसाइटियों को बड़ा नुकसान हुआ है। कई सोसाइटी के प्रबंधकों ने कहा है कि ऐसी देरी जानबूझ कर कराई गई ताकि, उन्हें नुकसान का सामना करना पड़े। ऐसे कृत्य करने और निर्णय लेने वाले लोग अपने को किसान का हितैषी बताकर फिर सभी के साथ छलावा करने में लगे हुए है।
जलाशय से नहीं दिया जा रहा पानी
सांसद विजय बघेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य के ज्यादातर हिस्से इस समय अल्पवर्षा, सूखे के संकट से जूझ रहे है। खेतों में खड़ी फसल सूख रही है। खेतों को पानी की जरूरत है। लेकिन बाधों से पानी नही छोड़ा जा रहा है। किसानों की आंखों में आंसू है। राज्य सरकार किसान हितैषी होने का ढोंग करने वाले कोई निर्णय लेने में सक्षम नहीं दिख रहे है।
