जिला पंचायत में शुक्रवार को सामान्य सभा की बैठक में खैरागढ़ क्षेत्र में बनाई गई और निर्माणाधीन सड़कों को लेकर सदस्यों ने गुणवत्ता को लेकर सवाल उठाए। दनिया से बुंदेली तक बनी सड़क चार माह के भीतर उखड़ने पर सदस्यों ने पीडब्ल्यूडी के ईई को घेरा। सदस्यों ने स्पष्ट आरोप लगाया कि निर्माण के दौरान अफसरों ने झांका तक नहीं और अब सड़क उखड़ रही है तो कई बहाने बना रहे हैं।
जिला पंचायत सदस्य प्रियंका ताम्रकार ने यह मुद्दा उठाया और बताया कि हाल ही में बनी सड़क की हालत खराब हो चुकी है। सड़क देखने से लगता है कि अफसरों ने गुणवत्ता का ध्यान ही नहीं दिया है। उक्त महिला सदस्य की ओर से सवाल उठाए जाने पर ईई ने जवाब दिया पर ईई के बात करने के अंदाज पर जिपं सदस्य भड़क गए। सदस्यों का कहना था कि एक महिला सदस्य ने सवाल उठाया तो ईई सही तरीके से जवाब नहीं दे रहे हैं।
गुणवत्ता की जांच हो
सदस्यों ने इस बात पर जमकर हंगामा किया और कहा कि सड़कों की गुणवत्ता जांच होनी चाहिए। इसी तरह सहकारिता विभाग के अफसरों से जानकारी ली गई कि जिले में खाद का संकट चल रहा है। ऐसी स्थिति में खाद को लेकर क्या व्यवस्थाएं की जा रही है। अफसरों ने बताया कि जिले में 4 हजार टन खाद की डिमांड है पर 831 मिट्रिक टन खाद पहुंची है।
किसानों में बंटी खाद
सदस्यों ने सहकारी और प्राइवेट सेक्टर में वितरण का रेशियो पूछा। अफसरों ने 40:60 का रेशियो बताया। सदस्यों ने इसकी निगरानी किए जाने की मांग की। खनिज विभाग की ओर से अवैध उत्खनन को लेकर की जा रही कार्रवाई की भी जानकारी ली गई। वहीं खनिज मद के तहत प्रभावित क्षेत्रों में काम कराए जाने की बात कही।
दिव्यांगों को दी जा रही मोपेड
सदस्यों के सवाल पर समाज कल्याण विभाग के अफसरों ने बताया कि ट्रायसिकल वितरण पर फिलहाल रोक लगी है। बल्कि इसकी जगह पर पेट्रोल से चलने वाली मोपेड दी जा रही है। इसके लिए 40 प्रतिशत दिव्यांगता जरूरी है। बताया कि हितग्राही उम्र 40 वर्ष से कम होनी चाहिए। वहीं आय 20 हजार से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।
यहां लेप्स हो जाती है राशि
सदस्यों ने बताया कि मानपुर क्षेत्र में लाखों खर्च कर स्कूल भवनों का निर्माण तो किया गया है पर वन विभाग के अफसर बाउंड्रीवॉल निर्माण के लिए अनुमति नहीं दे रहे हैं। बाउंड्रीवॉल की राशि इस चक्कर में लैप्स हो रही है। सदस्यों ने वन विभाग के अफसरों से कहा कि एक टीम बना ली जाए और निर्माण के लिए अनुमति दी जाए, क्योंकि ज्यादातर फॉरेस्ट की जमीन ही है।
लोकार्पण की नहीं दी सूचना
जिपं सदस्य अशोक देवांगन ने सवाल दागा कि सुकुल दैहान यूटिलिटी सेंटर बना है। इसका लोकार्पण मुख्यमंत्री ने वर्चुअल तरीके से राजधानी में किया पर गांव के सरपंच और पंचों तक को खबर नहीं दी गई। यह दुर्भाग्य की बात है कि ग्रामीणों को विश्वास में नहीं लिया गया और लोकार्पण कर दिया गया जबकि मुख्यमंत्री को स्वयं यहां आना था।
