शिक्षा विभाग की ओर से शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत बंद हो चुके स्कूल के नाम से भी लॉटरी निकाल दी गई। बाकायदा आठ बच्चों को सीटों का आवंटन भी कर दिया गया और अब पालक जब एडमिशन के लिए स्कूल पहुंच रहे हैं तो पता चल रहा है स्कूल तो कब से ताला लग चुका है।
स्कूल का संचालन ही नहीं हो रहा है। नोडल अफसर की ओर से बंद हो चुके स्कूल की जानकारी पोर्टल में दे दी गई। ग्राउंड स्तर पर पता ही नहीं लगाया गया कि स्कूल चालू या फिर बंद है। कन्हारपुरी क्षेत्र में एक बंद हो चुके प्राइवेट स्कूल की सीटों को पोर्टल में जारी कर दिया गया। इसलिए पालकों ने उक्त स्कूल में ऑप्शन दिया और लॉटरी निकली तो आठ बच्चों का चयन भी हो गया है। मामला सामने आने के बाद से शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। गलती सुधार करने अफसर जुटे रहे पर कोई रास्ता नहीं निकल पाया है। इस पूरे मामले में डीईओ एचआर सोम का कहना है कि गलती कहां पर हुई? इसका पता लगा रहे हैं।
