सोमवार 16 अगस्त के दिन देश भर के लोग पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को उनकी पुण्यतिथि पर याद कर रहे हैं। वो भले ता उम्र भाजपा के झंडे तले सियासत करते रहे हों मगर उनके चाहने वाले हर दल, हर संगठन में हैं। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने अटल बिहारी वाजपेयी को याद करते हुए एक ट्वीट किया। उन्होंने अटल बिहारी को गुरु बताते हुए लिखा कि वो उनकी परछाई बनकर चलते रहे। छत्तीसगढ़ राज्य बनने के पीछे की कहानी के मुख्य किरदार अटल बिहारी वापजेयी ही थे। जानिए एक वादे के पूरे होने के पीछे का रोचक किस्सा।
डॉ रमन सिंह का ट्वीट

अटल वादा जो पूरा हुआ
मध्य प्रदेश से अलग छत्तीसगढ़ राज्य की मांग के बीच वर्ष 1998-99 के आम चुनाव के दौरान अटल बिहारी वाजपेयी की रायपुर के सप्रे शाला मैदान में आमसभा थी। इस सभा में उन्होंने जनता से कहा था कि आप मुझे 11 सांसद दो, मैं आपको छत्तीसगढ़ दूंगा। चुनाव में 7 भाजपा सांसद जीते। मगर अटल बिहारी ने अपना वादा पूरा किया था। 31 जुलाई 2000 को लोकसभा में और नौ अगस्त को राज्यसभा में छत्तीसगढ़ राज्य के प्रस्ताव पर मुहर लगी। चार सितंबर 2000 को भारत सरकार के राजपत्र में प्रकाशन के बाद एक नवंबर 2000 को छत्तीसगढ़ देश के 26वें राज्य के रूप में अस्तित्व में आया। छत्तीसगढ़ राज्य की मांग 1965 से ही शुरू हो गई थी, लेकिन इसे पूरा किया वाजपेयी ने।

रायपुर में सभा के दौरान अटल बिहारी।
भतीजी करुणा शुक्ला ने कहा था उनका सपना पूरा नहीं हुआ
दैनिक भास्कर को दिए अपने आखिरी इंटरव्यू में अटल बिहारी वाजपेयी की भतीजी करुणा शुक्ला ने कहा था कि राज्य निर्माण में अटल जी ने अपना बड़ा योगदान दिया। मगर बीते 15 सालों में डॉ रमन सिंह और भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने अटलजी के सपनों का छत्तीसगढ़ बनाने की दिशा में काम नहीं किया। इसका मुझे दुख है। अटल जी गांव, गरीब और सबसे पहले प्रदेश के आदिवासियों का बेहतर विकास चाहते थे। भाजपा में कुछ साल रहने के बाद करुणा सियासी उपेक्षा से तंग आकर कांग्रेस पार्टी में आ गईं थीं। कुछ महीने पहले ही कोविड की वजह से करुणा का भी निधन हो गया।

अटल जी के साथ करुणा शुक्ला।
रायपुर में खाया था आटे का हलवा
करुणा शुक्ला के पिता अवध बिहारी वाजपेयी, अटल बिहारी के भाई थे। जब कभी परिवार के लोगों से अटल बिहारी मिलने आते तो खास पकवान तैयार किए जाते थे। करुणा ने बताया था कि अटलजी भी खाने के बेहद शौकीन थे। हम बहनें और सभी बुआ मिलकर खाना तैयार करती थीं। सन 77 की बात है, तब मैं कसडोल में थी, अटल जी रायपुर आए थे, मैं उनके लिए आटे का हलवा बनाकर लाई थी।
घर के लोगों से घर की बात
अटलजी को घर के लोगों के साथ राजनीति की चर्चा करना पसंद नहीं था। सिर्फ घर की बातें ही होती थीं। हां छत्तीसगढ़ को लेकर उनके मन में विशेष जगह थी, उन्होंने कहा था कि इस राज्य के बनने के बाद वो यहां के लोगों के लिए अच्छे काम करना चाहते हैं। वो अक्सर छत्तीसगढ़ आने पर तब के वरिष्ठ पत्रकार मधुकर खेर को याद किया करते थे।
