रकम डबल कर देने और जमीन के व्यवसाय से जोड़ने का झांसा देकर चिटफंड कंपनियों ने जिले के हजारों लाेगों को धोखाधड़ी का शिकार बनाया। करोड़ों रुपए चपत कर कंपनियां गायब हो गई हैं। डूबत रकम की वापसी की उम्मीद के साथ निवेशक रोज आवेदन देने सामने आ रहे हैं। जिलेभर में 60 हजार से ज्यादा आवेदन अब तक जमा हो चुके हैं। इधर प्रशासन के पास कंपनियों की चल-अचल संपत्तियों का कोई रिकॉर्ड नहीं है। निवेशकों की ओर से दिए जा रहे दस्तावेजों के आधार पर प्रशासन कंपनियों के बारे में पड़ताल करेगी, तब कहीं जाकर संपत्तियां कुर्क कर रकम की वापसी कराई जाएगी। इस पूरी प्रक्रिया में अभी लंबा समय लगेगा।
निवेशकों की ओर से हर एसडीएम और तहसील कार्यालय में आवेदन जमा किए जा रहे हैं। प्रशासन की पूरी टीम आवेदन लेने और इसे सबमिट करने में जुटी है। इन आवेदनों में निवेशकों की ओर से कंपनियों की ओर से दिए गए दस्तावेज को भी सबमिट किया जा रहा है। किस स्कीम के तहत रकम जमा कराई गई। कितनी बार ब्याज मिला। वहीं कंपनियों की ओर से कहां-कहां रकम निवेश की गई है। कंपनियों की ओर से दिए गए स्थाई पता और ठिकाने से संबंधित दस्तावेज भी मांगे जा रहे हैं ताकि अफसर पता लगा सकें कि कंपनियों के संचालक कहां हैं।
एजेंट गायब, मजबूरी में निवेशक खुद ही दे रहे आवेदन
रकम वापसी की प्रक्रिया शुरू होने के बाद से निवेशकों को स्वयं ही आवेदन जमा करना पड़ रहा है। ज्यादातर एजेंट तो निवेशकों से मिल नहीं रहे हैं। निवेशकों को कंपनी के बारे में विस्तार से जानकारी तक नहीं है। मचानपार के हीरामन रजक, सोहिल वर्मा और गितेश सोनकर ने बताया कि कंपनी के सारे दस्तावेज एजेंट के पास थे। हर माह पेंशन स्कीम के नाम पर 1 हजार रुपए एजेंट को थमा देेते थे। इसकी कोई रसीद नहीं दी गई है। केवल एक दस्तावेज ही है।
3 लाख रुपए जमा किए, एक बार भी ब्याज नहीं मिला
हल्दी निवासी रमेश सोनकर ने बताया कि कंपनी की ओर से दिए गए दस्तावेज में नंबर भी है। इस नंबर पर कई बार कॉल कर चुके हैं पर कोई रिसीव नहीं कर रहा। तुलसीपुर निवासी हेमंत रामटेके ने बताया कि चिटफंड कंपनी में 3 लाख रुपए जमा किए हैं। एक बार भी ब्याज नहीं मिला। जिस एजेंट के माध्यम से रकम जमा कराए थे, उसका निधन हो गया है। एजेंट के पास ही सारे दस्तावेज थे। अब चक्कर लगाने मजबूर हैं। आखिर हम जाएं तो कहां जाएं।
आवेदन को एकत्रित करने के बाद कम्प्यूटराइज्ड करेंगे
अफसरों ने बताया कि निवेशकों से लिए गए आवेदन को एकत्रित करने के बाद कम्प्यूटराइज्ड करेंगे। जिस-जिस कंपनी का नाम सामने आएगा, उसकी सूची बनाई जाएगी। पुलिस और राजस्व की टीम आवेदनों का सत्यापन करने के साथ ही कंपनियों का पता लगाएगी। वहीं यह देखा जाएगा कि कंपनियों ने कहां-कहां पर पैसे निवेश किए हैं। चल-अचल संपत्ति का पता लगाया जाएगा। इसके बाद कलेक्टर के माध्यम से कुर्की की प्रक्रिया शुरू होगी। डीजे कोर्ट से कुर्की का आदेश पारित होने पर प्रक्रिया पूरी करेंगे। इसके बाद कुर्क रकम को निवेशकों में वापसी होगी।
20 तक आवेदन लिए जाएंगे, फिर आगे की प्रक्रिया होगी
अपर कलेक्टर सीएल मारकंडे ने बताया कि अभी 20 अगस्त तक आवेदन लेंगे। इसके बाद आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। शासन के निर्धारित गाइडलाइन का पालन करते हुए प्रक्रिया पूरी करेंगे। बताया कि आवेदनों का सत्यापन भी किया जाएगा ताकि पुष्टि हो सके कि संबंधित व्यक्ति में वाकई में किसी कंपनी में राशि निवेश की थी या नहीं? कंपनियों का पता लगाया जाएगा। कंपनी से जुड़े लोगों की भी जानकारी एकत्रित करेंगे। इसके लिए तैयारी की जा रही है।
