राजनांदगांव। राजनांदगांव विधानसभा क्षेत्र के विभिन्ना ग्राम पंचायतों में हरेली तिहार छत्तीसगढ़ी परंपरा के साथ धूमधाम से मनाया गया। छत्तीसगढ़ युवा आयोग के अध्यक्ष जितेंद्र मुदलियार भी हरेली तिहार कार्यक्रमों में शामिल हुए। इस दौरान विकास कार्यों के लिए भूमिपूजन कर गांवों को सौगातें दी। उन्होंने पौधारोपण कर हरियाली का संदेश भी दिया।
मुदलियार सुबह नगर निगम द्वारा नवागांव में आयोजित हरेली महोत्सव में शामिल हुए। उसके बाद ग्राम चंद्रेश्वर जलेसर में खेलकूद, पौधारोपण एवं भूमिपूजन में शामिल हुए। सुरगी एवं सिंघोला में विधि-विधान से पारंपरिक खेलकूद का उदघाटन किया। वहां पौधारोपण के साथ भूमिपूजन भी किया।
हरियाली त्योहार के अवसर पर मुदलियार दोपहर को जगलेसर भोथीपारकला, बजे रानीतराई, भंवरमरा, ठेकवा, कुम्हालोरि पहुंचे। इस दौरान उनके साथ लिा पंचायत सदस्य आंगेस्वर देशमुख, जनपद उपाध्यक्ष रोहित चंद्राकर, ब्लाक कांग्रेस अध्यक्ष घनश्याम देवांगन, युवा कांग्रेस अध्यक्ष चेतन भानुशाली एवं अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।
आर्थिक स्थिति में हुई सुधार
हरेली के दिन दौरे के दौरान जितेंद्र मुदलियार ने राज्य सरकार द्वारा गरीब, मजदूर और किसानों के हित में बनाई गई योजनाओं के बारे में बताया। उन्होंने लोगों से इन योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने को कहा। उन्होंने गोधन न्याय योजना के बारे में बताया कि इस योजना से किसानों और पशुपालकों की आर्थिक स्थिति में पहले की अपेक्षा सुधार हई है। पौधारोपण कर हरियाली का संदेश दिया गया।
गेड़ी चढ़कर लोगों का उत्साह बढ़ाया
मुदलियार ने विधि-विधान से खेती-किसानी से जुड़े यंत्रों की पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ पूजा-अर्चना की। छत्तीसगढ़ सहित जिले की खुशहाली की कामना की। युवा आयोग के अध्यक्ष ने स्वयं गेड़ी चढ़कर लोगों का उत्साह बढ़ाया। उन्होंने कहा कि भूपेश सरकार द्वारा पारंपरिक संसाधनों को पुनर्जीवित कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाया जा रहा है। गोठानों को ग्रामीण आजीविका केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।
गांव-गांव तक किया जा रहा क्रियान्वयन
आयोजनों में मुदलियार ने बताया कि सुराजी गांव का सपना माननीय भूपेश बघेल जी की सरकार पूरा करने के लिए अथक प्रयास कर रही है। इसे ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ के चार चिन्हारी नरवा, गरवा, घुरूवा और बाड़ी योजना का क्रियान्वयन गांव-गांव तक किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति को एक सूत्र में पिरोने का कार्य विभिन्ना छत्तीसगढ़ी तिहार के माध्यम से किया जा रहा है।
