डेढ़ साल के बाद 2 अगस्त से जिले में स्कूल खुलेंगे और कक्षाएं लगेंगी। शासन ने गाइडलाइन जारी किया है पर निर्देश स्पष्ट नहीं होने से शिक्षकों के साथ ही पालक भी उलझन में हैं। इस वजह से ज्यादातर गांवों में कक्षा 10 से 12 वीं तक की कक्षाएं संचालित करने की सहमति पालकों ने दी है।
प्राइमरी स्तर के बच्चों को पालक स्कूल भेजने से कतरा रहे हैं। इनकी पढ़ाई मोहल्ला क्लास में ही होगी। वहीं कक्षाएं ऑनलाइन संचालित की जाएगी। इधर तैयारी के बीच शिक्षकों की मनमानी सामने आ रही है। रविवार को स्कूल खुलने के एक दिन पहले उपरवाह प्राथमिक शाला में बच्चों से सफाई कराई जा रही थी। स्कूल परिसर में उग आए खरपतवार सहित झाड़ियों की सफाई भी बच्चों से कराई गई।
दूसरे स्कूलों में भी यही हाल रहा जबकि शासन स्तर से सफाई के लिए फंड जारी किया गया है। स्कूल संचालन की अनुमति को लेकर भास्कर ने पड़ताल की तो पता चला कि ज्यादातर गांवों में प्राइमरी स्तर के बच्चों को पालक स्कूल भेजने से कतरा रहे हैं। हरडुवा स्कूल में कक्षा 10 वीं और 12 वीं की कक्षाएं लगेंगी। प्राइमरी की कक्षाएं नहीं लगेगी।
यहां नहीं लगाई जाएगी कक्षाएं
बजरंगपुर-नवागांव स्कूल फिलहाल संचालित नहीं होगी। पालकों ने सितंबर माह से स्कूल संचालन करने की सहमति दी है। पालकों का कहना है कि जिले में वायरल फीवर का प्रकोप है। ऐसे में बच्चों को स्कूल भेजकर रिस्क नहीं उठा सकते। धौंराभाठा के सरपंच नोमेश वर्मा ने बताया कि पालकों से चर्चा कर कक्षा 10 वीं और 12 वीं कक्षा संचालित करने की अनुमति दी गई है। प्राइमरी के सीमित बच्चों को स्कूल बुलाने कहा गया है।
अल्टरनेट सिस्टम बनाया गया
सलौनी में प्राइमरी की कक्षाएं लगेंगी पर यहां पर एक दिन छात्र आएंगे तो दूसरे दिन छात्राएं आएंगी। यहां मिडिल की कक्षाएं नहीं लगेंगी। कक्षा 10 वीं और 12 वीं की कक्षाएं लगेंगी। इसके चलते शिक्षक असमंजस में हैं कि स्कूल में क्लास लेंगे या फिर ऑनलाइन पढ़ाई कराएं। इसे लेकर शिक्षक फेडरेशनों ने लगातार मांग रखी है कि शासन स्थिति को स्पष्ट करे पर अब तक अफसर असमंजस की स्थिति बनाए हुए हैं।
प्रोटोकॉल का पालन कैसे होगा?
इधर शिक्षक संगठनों की ओर से लगातार मोहल्ला क्लास विरोध किया जा रहा है। अंबागढ़ चौकी क्षेत्र में एक बालक की सर्पदंश से मौत के बाद भी अफसर प्राइमरी स्तर के बच्चों के लिए मोहल्ला क्लास लगवाने आदेश जारी कर रहे हैं। शिक्षक संगठनों का कहना है कि बारिश के दिनों में मोहल्ला क्लास मुश्किल है। ऐसे में अनहोनी का खतरा बना रहेगा। वहीं कोविड प्रोटोकॉल का पालन कराना भी संभव नहीं हैं।
सभी को नहीं लगा टीका
शिक्षकों का शत प्रतिशत वैक्सीनेशन नहीं हुआ है। क्लास लगाने पर कहीं न कहीं शिक्षक तो बच्चों के संपर्क में आएंगे। पालक चिंतित हैं कि कहीं कोरोना संक्रमण का सामना न करना पड़ जाए। जिला शिक्षा विभाग में रिकॉर्ड ही नहीं है कि अब तक कितने शिक्षकों का वैक्सीनेशन हो चुका है। शिक्षकों का कहना है कि अन्य विभाग के कर्मचारियों की तरह वैक्सीनेशन के लिए सुविधा भी नहीं दी जा रही है।
ऐसी की गई है व्यवस्था
इधर डीईओ एचआर सोम का कहना है कि शासन की गाइडलाइन के अनुसार कक्षा 8 वीं, 10 वीं और 12 वीं की कक्षाएं लगेंगी। कक्षा पहली से पांचवी और 6 वीं व 7 वीं के लिए पालकोंं की अनुमति से कक्षाएं लगेंगी। बच्चों से सफाई नहीं करानी है। इसके लिए कर्मचारी रखे गए हैं। स्कूलों को सफाई और सैनिटाइज के लिए फंड दिया गया है। स्कूलों की टाइमिंग सुबह 10.30 से 4 बजे तक निर्धारित की गई है।
