सेवा सहकारी समिति के कर्मचारी नियमितीकरण की मांग को लेकर बेमियादी हड़ताल पर हैं। पांच दिन से सोसाइटियों में ताला लटक रहा है। किसानों को खेती के सीजन में खाद नहीं मिल रही है। फसल का बीमा नहीं करवा पा रहे हैं। गोबर खरीदी भी ठप हो गई है। किसानों को नकद राशि के लिए भटकने की नौबत आ गई है। इन हालातों के बाद भी प्रशासन ने किसानों को राहत पहंुचाने के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की है।
किसानों का कहना है कि बारिश के बाद खाद की जरूरत ज्यादा पड़ रही है, ताकि पीले पड़ रहे धान की फसल में खाद का छिड़काव करने से सुधार आ पाएगा। वनांचल में कुछ सोसाइटियों के खुले होने की शिकायत मिलने पर गुरुवार को सेवा सहकारी कर्मचारी संघ के जिला अध्यक्ष रूपनारायण हिरवानी अपनी टीम के साथ दौरे पर थे। अलग-अलग टीमें बनाकर जिले के हर क्षेत्र में भेजा गया। कर्मचारियों ने 24 जुलाई से हड़ताल की शुरुआत की है।
पदाधिकािरयों ने दी दबिश: अध्यक्ष हिरवानी ने बताया कि टीमों को अलग-अलग हिस्से में भेजा गया है। हालांकि कहीं भी सोसाइटी खुली हुई नहीं पाई गई। प्रबंधकों को हिदायत दी गई है कि जब तक मांगें पूरी नहीं हो जाती, तब तक सोसाइटी का ताला नहीं खोलेंगे। खाद, बीज का वितरण संबंधित कोई भी डाटा अफसरों को नहीं देंगे। संघ की टीम ने मोहला, मानपुर, साल्हेवारा, बकरकट्टा सहित अन्य क्षेत्रों में दबिश दी। सभी जगहों पर हड़ताल जारी है।
व्यवस्था बनानी चाहिए
हड़ताल के चलते किसानों की परेशानी बढ़ गई है। उन किसानों को सबसे ज्यादा दिक्कत हो रही है जो कि अब तक फसल का बीमा नहीं करा पाएं हैं। खेती संबंधित सामग्री खरीदी के लिए नकद राशि जरूरी है पर सोसाइटियों के बंद रहने के चलते मुसीबत में पड़ गए हैं। किसानों का कहना है कि सुविधा देने वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए। जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक के सीईओ सुनील कुमार वर्मा ने बताया कि वैकल्पिक व्यवस्था संबंधित शासन से कोई गाइड लाइन नहीं आई है।
