राजनांदगांव । अपने में ऐतिहासिक विरासत को समेटे हुए शहर का पुराना बस स्टैंड आज अपनी बदहाली के दौर से गुजर रहा है। इस बस स्टैंड को बेहतर बनाने के लिए बस आपरेटरों सहित शहर के जिम्मेदार नागरिकों ने कई बार आवाज बुलंद की लेकिन शासन प्रशासन के नुमाइंदों ने इस बस स्टैंड की बदहाल स्थिति को सुधारने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया। इस ऐतिहासिक बस स्टैंड का कायाकल्प करने की बजाय शहर में एक और नया बस स्टैंड बना दिया गया।
नया बस स्टैंड की स्थिति भी रखरखाव के अभाव में बदतर हो चुकी है। पुराने बस स्टैंड से प्रतिदिन 100 से अधिक बसों का आवागमन होता है, इसके बावजूद इस बस स्टैंड के हालात सुधारने के लिए काम नहीं किया गया। वक्त बीतता गया और पुराना बस स्टैंड जर्जर होकर खंडहर में तब्दील हो गया। यहां यात्रियों के लिए बने प्रतीक्षालय में अब मवेशियों का डेरा रहता है और रात के वक्त असामाजिक तत्व के लोग शराब पीने के रूप में भी उपयोग करते हैं। यहां न यात्रियों को बारिश से बचने की सुविधा है और न ही कड़ी धूप में छांव की व्यवस्था।
एक घंटे की बारिश में बन जाता है टापूः शहर के पुराने बस स्टैंड सड़क कीचड़ के गढ्ढो?ं में गायब हो चुकी हैं और अब यहां केवल गड्ढे ही नजर आते हैं, लगभग एक घंटे की बारिश में ही यह बस स्टैंड पूरी तरह से जलमग्न हो जाता है और किसी टापू की तरह दिखाई देने लगता है। लगभग 3 दिनों के बाद अगर बारिश का पानी इस बस स्टैंड से उतर भी जाता है तो यहां फिर कीचड़ के हालात निर्मित हो जाते हैं, जो 15 दिनों तक यूं ही बने रहते हैं। बारिश के दिनों में यहां से गुजरना भी दूभर हो जाता है। बस चालक भी यात्रियों को बस स्टैंड से नहीं फिर सड़कों से अपनी बसों में बैठाते हैं। यहां पर पानी निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने की वजह से ऐसे हालात निर्मित होते हैं। वहीं गड्ढों की वजह से यहां पानी भरा रहता है। स्थानीय जनप्रतिनिधि सारे हालातों से वाकिफ हैं, इसके बावजूद ना यहां डामरीकरण हो रहा है और ना ही सीसी रोड बनाई जा रही है, ऐसे में पुराना बस स्टैंड कई दशकों से इसी तरह बदहाल स्थिति में पड़ा हुआ है।
दो दशक से कायाकल्प की उठ रही मांग : शहर के पुराने बस स्टैंड की दुर्दशा को ठीक करने के लिए लगभग दो दशक से भी अधिक समय से लोग जनप्रतिनिधियों से मांग करते आ रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय अजीत जोगी के शासन काल से लेकर अब तक के स्थानी महापौर तक गुहार लगा चुके हैं, लेकिन बस स्टैंड की जर्जर स्थिति को किसी ने नहीं सुधारा है। यात्रियों के लिए यहां कोई सुविधा नहीं है, वहीं बस स्टैंड का ड्रेनेज सिस्टम भी खराब है।
मध्य प्रदेश सरकार के समय यहां पर राज्य परिवहन की बसों का संचालन होता था उस दौर में राजनांदगांव शहर के एकमात्र ऐतिहासिक बस स्टैंड में यात्रियों के लिए बेहतर सुविधा थी, यहां पर यात्री प्रतिक्षालय, टिकट काउंटर, पेयजल व्यवस्था थी, लेकिन अब सब कुछ खंडहर में तब्दील हो चुका है। अब यहां न छांव मिलता है और ना ही पीने को पानी, यहां आने वाले यात्रियों को कड़ी धूप और बारिश के बीच खड़े होकर बसों का इंतजार करना पड़ता है। स्वच्छ भारत के इस दौर में भी यहां शौचालय और मुत्रालय की सुविधा भी नहीं है, यही वजह है कि पुराने बस स्टैंड में यात्री आना पसंद नहीं करते हैं।
पुराने बस स्टैंड की स्थिति को सुधारने के लिए छत्तीसगढ़ राज्य के निर्माण होने के बाद से ही स्थानीय लोग अजीत जोगी के शासनकाल, डॉ रमन सिंह के शासनकाल और अब कांग्रेस के शासनकाल में भी अनगिनत जनप्रतिनिधियों से गुहार लगा चुके हैं। बस स्टैंड के कायाकल्प को लेकर योजनाएं तो बनी लेकिन उस पर अमल नहीं हुआ, यहां शापिंग कंपलेक्स निर्माण की योजना भी थी लेकिन यहां से बसों के संचालन को बंद किया जा रहा था, जिसके चलते स्थानीय लोगों ने इसका विरोध किया और पुराना बस स्टैंड अपनी वहीं स्थिति में पडा? रहा।
