छुईखदान। भगवान जगन्नााथ की रथयात्रा को लेकर भक्तों में जमकर उत्साह दिखा। सोमवार को जमातपारा स्थित भगवान जगन्नााथ मंदिर से रथयात्रा निकाली गई। सुंदर रथ में सवार होकर भगवान जगन्नााथ, भाई बलभद्र व बहन सुभद्रा भक्तों को दर्शन देने निकले। भगवान जगन्नााथ के रथ को खींचने भक्तों में जमकर उत्साह दिखा। भक्तों ने बारी-बारी से रथ को खींचते हुए नगर का भ्रमण कराया। अन्य साल की अपेक्षा इस वर्ष रथ यात्रा में भक्तों की कम भीड़ रही, लेकिन भक्तों का उत्साह छलक पड़ा। भक्तों ने मास्क व सैनिटाइजर का उपयोग करते हुए रथयात्रा में शामिल हुए। जगह-जगह भगवान जगन्नााथ की पूजा-अर्चना की गई।
वैष्णव धर्मावलंवलंबियों का रियासत का नगर छुईखदान में रियासत काल से आज तक समस्त हिंदू त्योहार को मनाने का एक प्रचलन निरंतर चल रहा है। उसी परंपरा का निर्वहन करने आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाने वाला जगन्नााथ रथयात्रा पर्व का अपना एक महत्व है। रियासत काल में निर्मित मंदिर जिसे बड़े जमात के नाम से जाना जाता है। उस मंदिर से भगवान जगन्नााथ भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा का रथ औपचारिक रूप से श्रद्धालुओं की बड़ी भीड़ रथ को खींचते हुए नगर भ्रमण कराया जाता है। रथ को देखने ग्रामीण क्षेत्रों से लोग पहुंचते हैं। रथ यात्रा में भजन मंडली द्वारा भजनों की प्रस्तुति दी गई। भगवान जगन्नााथ की रथ खींचने भक्त टूट पड़े।
गजा मूंग की प्रसादी बांटी गई भगवान जगन्नााथ की रथ यात्रा में जो प्रसादी भोग लगाकर श्रद्धालुओं को बांटी जाती है।प्रसादी मूंग एवं चने की होती है और उस प्रसादी को गजा मूंग कहा जाता है। छत्तीसगढ़ में इस प्रसादी गजा मुंग को एक मित्रता का अभिन्ना रिश्ता बनाने के लिए गजा मूंग का उपयोग कर जीवन पर्यंत उस रिश्ते को निभाने के लिए शपथ लिया जाता है। लेकिन यह परंपरा विलुप्त हो रही है। नगर की सेवा भावी संस्था जय जगन्नााथ समिति द्वारा रथयात्रा के इस पर्व पर पुराने पुलिस थाना के समीप भंडारा का आयोजन किया गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रसादी का ग्रहण किया।
