मदनवाड़ा थाने के अंतर्गत कोरकोट्टी में 12 जुलाई 2009 को नक्सलियों के एंबुश में फंसकर एसपी स्व.वीके चौबे सहित 29 जवान शहीद हुए थे। आज इस घटना की 12वीं बरसी है। कोरकोट्टी में नक्सली हिंसा के निशान आज भी मौजूद हैं। 12 साल बाद भी उन पेड़ों पर गोलियों की छेद देखी जा सकती है। जो मुठभेड़ में नक्सलियों ने फोर्स पर बरसाई थी।
लेकिन दहशतगर्दी के ये निशान मिटने के पहले ही हमारा मदनवाड़ा बदल गया है। कभी गोलियों की गूंज और नक्सली दहशत का सेंट्रल पाइंट रहे मदनवाड़ा में अब हाईस्पीड इंटरनेट सेवा युवाओं की जिंदगी बदल रही है। पुलिस ने यहां शहीद स्व.वीके चौबे के नाम से इंटरनेट कैफे शुरू किया है। जहां युवा पढ़ाई व प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए कंटेंट जुटा रहे हैं। दुनिया में हो रहे घटनाक्रमों को जान रहे हैं।
कभी इस हिस्से से लगे गांवों में बिजली के कनेक्शन तक नहीं थे, लेकिन अब स्मार्ट फोन से लेकर टीवी और मनोरंजन के दूसरे साधन मौजूद हैं। प्रशासनिक सक्रियता और पुलिस की बढ़ी दखल के बीच यह सब संभव हो पाया है। 12 साल बाद आज का मदनवाड़ा और यहां रहने वाले लोग सुरक्षा के साथ नए संसाधनों से समृद्ध होते जा रहे हैं। पढ़िए दैनिक भास्कर की ग्राउंड रिपोर्ट…। संबंधित खबर पेज 12 पर
संवेदनशील क्षेत्रों में 141 सड़कें
मानपुर व मोहला के अंतर्गत 141 महत्वपूर्ण सड़कों का निर्माण प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के माध्यम से बनाई गई। इसमें मानपुर क्षेत्र में 57 सड़कें शामिल हैं। मानपुर से कोंडे, मानपुर से ऊंचापुर, औंधी से नवागांव, सरखेड़ा से पंदोड़ी महत्वपूर्ण है। नक्सल प्रभावित मोहला क्षेत्र में 84 सड़कें बनाई गई हैं।
शिक्षा के क्षेत्र में भी बढ़ा मान
मदनवाड़ा के स्कूल में पदस्थापना के बाद भी शिक्षक ज्वाइनिंग नहीं लेते थे। दहशत ऐसी थी कि 6 शिक्षक के सेटअप वाले स्कूल में सालों तक कोई शिक्षक नहीं आता। इससे बच्चों की पढ़ाई बुरी तरह से प्रभावित होती रही है। वर्तमान में 5 शिक्षक यहां पदस्थ हैं। स्कूल का रिजल्ट 88 फीसदी तक पहुंच गया।
6 नए कैंप बने, चार का उन्नयन
कोरकोट्टी कांड के बाद ही नक्सल प्रभावित इलाकों में पुलिस ने अपनी ताकत बढ़ाई। 2009 के बाद अब तक मानपुर इलाके में 6 नए कैंप बनाए गए। इनमें डोमीकला, बसेली, पल्लेमाड़ी, जक्के, पानाबरस और भोजटोला शामिल हैं। पूर्व में कैंप रहे खड़गांव, कोहका, मदनवाड़ा व सीतागांव को थानों में तब्दील किया गया।
एसपी के नाम पर साइबर कैफे
मानपुर क्षेत्र पहले कनेक्टिविटी से अछूता था। लेकिन अब वहां के युवा साइबर कैफे का भी लाभ उठा रहे। यहां शिक्षित युवाओं के लिए शहीद एसपी स्व.वीके चौबे के नाम से साइबर कैफे भी खुल चुका है। इसका नाम चौबे साइबर कैफे रखा गया है। शिक्षित युवाओं को कंप्यूटर शिक्षा उपलब्ध कराने और अंदरुनी क्षेत्र के लोगों को पुलिस व प्रशासन से जोड़ने के लिए स्व.चौबे की स्मृति में मदनवाड़ा में यह कैफे बनाया गया है। 7 लाख 94 हजार रुपए की लागत से साइबर कैफे का निर्माण किया गया है। इसकी कनेक्टिविटी के लिए विभाग को काफी संघर्ष भी करना पड़ा।
ट्रेनिंग सेंटर का भवन तैयार
एक करोड़ की लागत से यहां ट्रेनिंग सेंटर का भवन तैयार किया गया है। इसमें जिला पुलिस बल, आईटीबीपी, सीएएफ के द्वारा नक्सल गतिविधि पर जिला व अंतरराज्यीय मीटिंग व विभिन्न प्रकार के कोर्स का प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके बनने से क्षेत्र में ही बड़े अफसरों व जवानों का प्रशिक्षण संपन्न हो जा रहा है।
30 बिस्तर का विशेष अस्पताल: घटना स्थल से 7 किमी दूर ब्लॉक मुख्यालय मानपुर है। यहां पिछले साल ही 30 बिस्तर का मल्टी स्पेशिएलिटी अस्पताल शुरू किया गया है। खास बात तो यह है कि इसमें मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर, शिशु रोग, हड्डी रोग तथा एनेस्थीसिया विशेषज्ञों की सुविधा उपलब्ध हो गई है। 10 डॉक्टर यहां सेवा दे रहे। हॉस्पिटल से तीन से चार ब्लाक के लोगों फायदा मिल रहा है। यहां का अस्पताल किसी प्राइवेट अस्पताल सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल से कम नहीं है।
ऐसे बदल रही विचारधारा
12 साल में कोई नहीं बना नक्सली
मदनवाड़ा कोरकोट्टी इलाकों को लेकर सबसे बेहतर स्थिति बदलती विचारधारा को लेकर बनी है। पुलिस रिकार्ड के मुताबिक बीते 12 साल में मदनवाड़ा, मानपुर इलाके से कोई भी नया नक्सली दलम का हिस्सा नहीं बना है। पुलिस की बढ़ती दखल और प्रशासनिक कसावट के साथ विकास ने लोगों को मुख्य धारा से जोड़ दिया है।
इस इलाके में कोई भी युवा नक्सल संगठन में शामिल नहीं हुआ है। इसे पुलिस सबसे बेहतर बदलाव मान रही है। इस हिस्से में सक्रिय नक्सली या तो पुराने हैं, या दूसरे जिलों से आकर वारदात करते हैं।
250 से अधिक युवा 5 सालों में मानपुर इलाके में सेना और पुलिस का हिस्सा बन चुके हैं। कभी नक्सली इस हिस्से में युवाओं को नक्सलवाद से जोड़ने अभियान चलाते थे।
