पेंड्री में मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल के संचालन के लिए लगभग 290 करोड़ रुपए खर्च कर बिल्डिंग बनाई गई है पर स्टॉफ की भर्ती में प्रबंधन की ओर से ढिलाई बरती जा रही है। पीडब्ल्यूडी को बिल्डिंग बनाने में लगभग 6 साल लग गए। इतना समय मिलने के बाद भी स्वीकृत सेटअप के अनुसार भर्ती नहीं होने से 600 बेड का हॉस्पिटल का संचालन लड़खड़ा सकता है। वहीं मान्यता भी खतरे में पड़ सकती है।
इधर लगातार एमसीआई की टीम ने निरीक्षण में पहुंच रही है। अब तक हॉस्पिटल प्रबंधन की ओर से डीएचएस के डॉक्टर और कर्मचारियों को सेटअप के अनुसार स्टॉफ बताकर मान्यता ले ली जा रही थी पर इधर डीएचएस की ओर से अलग से जिला अस्पताल संचालन को लेकर संकेत दिए जाने से मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल प्रबंधन की परेशानी बढ़ गई है।
ओपीडी संख्या कम होगी: मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल प्रबंधन ओपीडी को लेकर ज्यादा चिंतित है। शहर में मेकॉज व जिला अस्पताल का संचालन होने पर ओपीडी मरीज बंट जाएंगे। शहरी क्षेत्र के मरीज तो जिला अस्पताल में इलाज कराने आएंगे। इसलिए पेंड्री हॉस्पिटल में ओपीडी संख्या कम रहेगी। ऐसे में एमसीआई के नॉर्म्स का पालन नहीं हो पाएगा। इसे लेकर अस्पताल प्रबंधन की चिंता बनी हुई है।
अफसरों को लिखित आदेश का है इंतजार
शासन स्तर से जिला अस्पताल संचालन को लेकर लिखित आदेश नहीं आने से शिफ्टिंग की प्रक्रिया भी अटक गई है। अफसर आदेश का इंतजार कर रहे हैं। सहायक अधीक्षक का कहना है कि डीएमई के सामान ही शिफ्ट कर रहे हैं पर पहले जैसी रफ्तार अभी नहीं है। आदेश आने पर व्यवस्था में बदलाव आएगा। फिलहाल इसे लेकर अफसर कुछ ठोस जानकारी नहीं दे पा रहे हैं।
इसे लेकर जनप्रतिनिधियों से सलाह तक नहीं ली
अस्पताल की शिफ्टिंग शुरू करने से पहले मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल प्रबंधन की ओर से शहर के जनप्रतिनिधियों से सलाह तक नहीं ली गई। जबकि इनसे भी रायशुमारी करनी थी। जब शिफ्टिंग शुरू हुई और जिला अस्पताल का अस्तित्व खतरे में आने की खबर के बाद ही जनप्रतिनिधि हरकत में आए। मुख्यमंत्री तक बात पहंुचाई। महापौर हेमा देशमुख ने बताया कि जिला अस्पताल को लेकर जल्द सकारात्मक आदेश आएगा।
स्टॉफ की कमी, इधर छंटनी करने की तैयारी
मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल प्रबंधन पहले से ही स्टॉफ की कमी से जूझ रहा है। वहीं कोरोना काल में दैनिक वेतन पर रखे गए कुछ कर्मचारियों की छंटनी करने की तैयारी है। इसका विरोध हो रहा है। स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के जिला अध्यक्ष सत्यम हुमने ने जिले के प्रभारी मंत्री से भेंट कर छंटनी नहीं करने व कर्मचारियों को समय पर वेतन दिलाने की भी मांग रख चुके हैं।
पैसे वापस नहीं किए
मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल प्रबंधन की ओर से सेटअप की स्वीकृति होने के बाद 416 से ज्यादा पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया गया था। लगभग 20 हजार आवेदन जमा हुए थे। बेरोजगारों से 250-250 रुपए बैंक ड्रॉफ्ट जमा कराए गए थे। लाखों रुपए सरकारी फंड में जमा हुए। बेरोजगारों के पैसे वापस हुए हैं न ही भर्ती की गई है। आवेदनकर्ता आज भी मेडिकल कॉलेज के चक्कर लगा रहे हैं। इसे लेकर वे खासे परेशान हैं।
तीसरी लहर के लिए भी पहले से ही तैयारी जरूरी
इधर शिफ्टिंग के बाद कोरोना की तीसरी लहर की आशंका के बीच अस्पताल प्रबंधन को अतिरिक्त तैयारी करनी पड़ रही है। सहायक अधीक्षक डॉ. सीएस मोहबे का कहना है कि शासन से अनुमति मिलते ही भर्ती की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। कोरोना की तीसरी लहर के लिए अलर्ट रहते हुए व्यवस्था की जा रही है। डॉ. मोहबे ने बताया कि ऑक्सीजन प्लांट के साथ ही यहां पर लिक्विड ऑक्सीजन टैंक भी लगा रहे हैं।
