अनलॉक के बाद लगभग हर सामान महंगा, राहत कब मिलेगी पता नहीं
कोरोना की लहर तो शांत हो रही है। लेकिन अब महंगाई की लहर ने लोगों को परेशान कर दिया है। सुबह के चाय-पोहे से लेकर खाने की थाली तक महंगी हो गई। स्ट्रीट फूड में बिकने वाले पदार्थों के दाम भी बढ़ गए हैं। इसकी वजह तेल और दाल जैसे ़सामानों के बढ़े दाम को माना जा रहा है।
लॉकडाउन के पहले खाद्य की तेल की कीमत 110 रुपए प्रति लीटर के आसपास थी, लेकिन अब औसत क्वालिटी का खाद्य तेल भी 160 रुपए प्रति लीटर के हिसाब से बिक रहा है। तेल का यह दाम बीते 40 दिनों से स्थिर बना हुआ है। इसमें किसी तरह की गिरावट नहीं आई है। यही हाल दाल का भी है। किसी भी किस्म का अरहर दाल कम से कम 100 रुपए प्रति किलो में बिक रहा है। लंबे समय से दाल के दाम भी स्थिर हैं। हालांकि चावल के दाम में आंशिक बढ़ोतरी ही हुई है। लेकिन तेल के बढ़े दामों ने खाने-पीने के चीजों की कीमत में खासा इजाफा कर दिया है। तेल के बढ़े दाम ने घर के किचन का बजट तो बिगाड़ा ही है, सड़कों पर मिलने वाले स्ट्रीट फूड के दाम भी 10 से 15 रुपए प्रति प्लेट तक बढ़ा दिया है।
ट्रांसपोर्टिंग के दाम बढ़ने का भी दिख रहा असर, लॉकडाउन भी बना कारण
व्यापारियों की मानें तो सामानों के दाम बढ़ने के दो प्रमुख कारण है। पहला कारण लॉकडाउन है, जिसमें मांग के अनुरुप उत्पादन नहीं हो सका। इससे सामान महंगे हो गए। दूसरा कारण ट्रांसपोर्टिंग को भी माना जा रहा है। डीजल के दाम बढ़ने से माला भाड़ा भी बढ़ गया है। इसका असर हर सामान के दर पर पड़ रहा है। अनलॉक के बाद लगभग सभी चीजों के दामों में इजाफा हुआ है।
मटेरियल के दाम भी बढ़े निर्माण कार्यों में दिक्कत
महंगाई की मार खाने-पीने के सामानों से लेकर निर्माण संबंधी सामग्रियों पर भी है। सीमेंट से लेकर सरिया और रेत तक के दामों ने बड़ा उछाल लिया है। रेत शहर में 22 से 25 हजार रुपए प्रति हाईवा की दर से बिक रही है। वहीं सरिया 6 हजार रुपए प्रति क्विंटल के आसपास है। यही स्थिति सीमेंट में भी बनी हुई है। ठेकेदारों की मानें तो वर्तमान रेट के हिसाब से काम पूरा करने पर उन्हें बड़ा नुकसान उठाना पड़ेगा।
मनमानी: बस और ऑटो के किराए भी बढ़ने लगे
इधर यात्री वाहनों के किराए में भी बढ़ोतरी हो रही है। ऑटो से लेकर बस संचालक अपने मर्जी के हिसाब से किराया वसूल रहे हैं। इसकी वजह डीजल के बढ़े दामों को बताया जा रहा है। अनलॉक के बाद समिति संख्या में यात्री बस रुटों पर आए हैं। इसमें से कई बस संचालक निर्धारित से अधिक किराया वसूल रहे हैं। यही हाल आटो संचालकों का भी है। इसके पीछे ये अपनी मजबूरी बढ़े डीजल के दाम और कम किराए से नुकसान को बता रहे हैं।
