घोरदा नदी के नाम पर लिज और मोहभट्टा से अवैध रेत निकालने का आरोप
डोंगरगांव.। क्षेत्र के ग्राम घोरदा में रेत खदान में उत्खनन को लेकर गांव में विवाद व तनाव की स्थिति निर्मित हो गई है. ज्ञात हो कि बीते वर्ष 2019 में ग्राम के शिवनाथ नदी के लगभग 8 एकड़ भाग को नीलाम किया गया था. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार राजनांदगाँव के किसी कांग्रेसी नेता का पुत्र व्दारा लिए जाने की बात सामने आ रही है. इधर पंचायत प्रतिनिधि व ग्रामवासी लॉकडाऊन व कोरोना वायरस संक्रमण के मद्देनजर रेत उत्खनन तथा बाहरी व्यक्तियों के ग्राम में आवाजाही को प्रतिबंधित किये जाने की मांग के चलते रेत खदान को बंद किये जाने की मांग कर रहे हैं.
शनिवार को विवाद की स्थिति को देखते हुए तहसीलदार लीलाधर कंवर के पहुंचने की खबरें आ रही हैं. वहीं ग्रामीणों व पंचायत प्रतिनिधियों ने बताया कि उक्त रेत खदान के स्वीकृति अथवा नीलामी की सूचना संबंधित विभाग व व्यक्ति के व्दारा नहीं दी गई है और ना ही उत्खनित क्षेत्र का सीमांकन तथा चिन्हांकन नहीं किया गया है जो शासन के नियमों की अवहेलना है. ज्ञात हो कि उक्त विवादग्रस्त क्षेत्र से लगकर ही ग्राम मोहभ_ा व सुखरी क्षेत्र की सरहदें भी शामिल है. वहीं ग्रामीणों ने बताया कि संबंधित ठेकेदारों व्दारा भारी मशीनरी का उपयोग कर नदी की दिशा को बदलने का प्रयास किया जा रहा है. इससे ग्राम के अनेक कृषकों व शासकीय भूमि में कटाव की आशंका है.
ज्ञात हो कि शनिवार को तहसीलदार के पहंचने के बाद भी विवाद का पटाक्षेप नहीं हो पाया था. रविवार को अक्ती पर्व और ग्राम में त्यौहार होने के कारण खदान बंद था जबकि मौके पर भारी मशीनें व रेत से भारी हाईवा परिवहन की तैयारी में हैं. आज सोमवार को संबंधित व्यक्ति के व्दारा रेत उत्खनन व परिवहन का कार्य किया जा सकता है. ऐसी स्थिति में विवाद के बढऩे की आशंका है. इधर पंचायत प्रतिनिधि भी ग्रामीणों के स्वास्थ्य, महामारी की आशंका तथा लॉकडाऊन व सीमांकन के बाद ही किसी प्रकार की निर्णय की बात कही है.
ऐसा आरोप इसीलिए भी लगते है उसका सीधा सा कारण है कि खनिज विभाग द्वारा कभी भी किसी भी खदान का सीमांकन कराए जाने अथवा मार्किंग कराए जाने के लिए कभी गंभीर दिखाई नही दिए फ लस्वरूप जिले भर के खदानों में स्वीकृत खदान मालिको के द्वारा जमकर अवैध खुदाई को भी अंजाम देते है ऐसा ही मामला डोंगरगांव तहसील क्षेत्र के ग्राम घोरदा नदी में देखने को मिला जहाँ स्वीकृति घोरदा का ले रखे है लेकिन सीमाओं का घेरा अथवा लोक हित मे ग्रामीणो को भी जानकारी हो ऐसा कोई मार्किंग नही किए है इसी बात को लेकर अब घोरदा नदी से रेत उत्खनन पर जमकर विवाद हो रहा है।
तहसीलदार से डरकर नदी में गाड़ी छोड भाग गए हाइवा ड्राइवर
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार विगत दिनों तहसीलदार के द्वारा उक्त खदान में छापामारा गया जिसमें तहसीलदार को मौके पर 10 हाइवा व 1 गाड़ी काम करते मिली लेकिन तहसीलदार को देखकर ड्राइवर भाग खड़े हुवे । मौके पर मिली गाडिय़ों में लिखे मोबाइल नंबर के द्वारा तत्काल ड्राइवर को पहुचने की हिदायत दिए गाँव के सरपंच व पंचो को बुलाए जहाँ पंचायत के सरपंच पंच ग्रामीण पहुँचे साथ ही स्वीकृत खदान ठेकेदार के तरफ से रेत माफिया भी पहूचे औररेत माफिया व तहसीलदार के बीच बहस होने की भी खबर सामने आ रही है जांच करने पर पता चला की रेत से भरा हाइवा था मौके पर रायल्टी पर्ची भी नही थी यह भी बताया जा रहा है कि बहस के बाद किसी भी प्रकार की कोई कार्यवाही नहीं होने की भी चर्चा है।
