राजनांदगांव। शहर के पेंड्री स्थित मेडिकल कालेज कोविड अस्पताल में डाक्टरों की लापरवाही का एक और मामला सामने आया है। इंजेक्शन नहीं लगाने की वजह से यहां संक्रमित शिक्षक की मौत हो गई। जबकि मरीज के स्वजन मेडिकल से इंजेक्शन लेकर भी आए थे, पर उसे लगाने के लिए डाक्टर ही नहीं आए। दो-ढाई घंटे बाद भी डाक्टर के नहीं आने से शिक्षक झरोखे लाल साव की सांस थम गई। इसके बाद मृतक शिक्षक के भांजे ने डाक्टरों पर लापरवाही करने का आरोप लगाया तो प्रबंधन ने पुलिस बुलवा ली। अस्पताल की अव्यवस्था का वीडियो बनाने वाली युवती के खिलाफ पुलिस ने मामला तक दर्ज कर लिया, जिसको लेकर स्वजनों ने अस्पताल में हंगामा भी किया। पुलिस और प्रबंधन की समझाइश के बाद भी स्वजनों का आक्रोश कम नहीं हुआ। स्वजनों ने प्रशासन और अस्पताल प्रबंधन से कोविड अस्पताल की व्यवस्था सुधारने की मांग की।
ग्राम धीरी निवासी 60 वर्षीय शिक्षक झरोखे लाल साव को दो दिन पहले भर्ती किया गया। शिक्षक झरोखे अंबागढ़ चौकी ब्लॉक के तिलारगोंदी मीडिल स्कूल में हेड मास्टर थे। उनके भांजे दुर्गेश साहू ने बताया कि दो दिन पहले उन्हें पेंड्री अस्पताल में भर्ती किए। गुरुवार सुबह डाक्टर ने इंजेक्शन मंगाया। शहर के आठ-दस मेडिकल स्टोर्स में भटकने के बाद दुर्गेश को इंजेक्शन मिला, जिसे लेकर वो अस्पताल गए। वहां स्टाफ कर्मियों को इंजेक्शन देकर लगाने कहा गया। लेकिन कर्मचारियों ने डाक्टर के राउंड पर आने के बाद ही इंजेक्शन लगाने की बात कहकर उन्हें लौटा दिया। करीब दो से ढाई घंटे तक शिक्षक का भांजा दुर्गेश इंजेक्शन को हाथ में लेकर डाक्टर का इंतजार करता रहा। डाक्टर आए ही नहीं। कुछ देर बाद उनके मामा झरोखे लाल की सांस उखड़ गई। मामा की मौत के बाद दुर्गेश डाक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए इंजेक्शन लेकर अस्पताल प्रबंधन के पास पहुंचे। डाक्टरों को इंजेक्शन नहीं लगाने के कारण मामा के मौत की जानकारी भी दी, पर डाक्टरों ने कुछ कहा नहीं। डाक्टरों की लापरवाही और अस्पताल की अव्यवस्था को लेकर एक युवती ने वीडियो भी तैयार की, जिसकी जानकारी मिलने के बाद प्रबंधन ने पुलिस बुलाई और युवती के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी। जिसका स्वजनों ने विरोध किया।
दबाव बनाकर डिलीट कराया वीडियो अस्पताल में हुए पूरे घटनाक्रम की एक युवती ने वीडियो बना ली है। जिसमें डाक्टरों ने इंजेक्शन नहीं लगाने के मामले में गोल-मोल जवाब दिए हैं। वीडियो की जानकारी मिलने के बाद प्रबंधन ने पुलिस बुलाकर युवती पर दबाव बनाया गया। युवती शहर के महेश नगर की है। वो अपनी मां को अस्पताल में भर्ती की है। प्रबंधन युवती पर दबाव बना रहे हैं कि अगर वीडियो डिलीट नहीं किया तो उसकी मां के इलाज में दिक्कत हो सकती है। इस तरह के दबाव के बाद युवती ने मोबाइल से वीडियो हटा दी। इसके बाद भी लालबाग की पुलिस टीम अस्पताल में मौजूद थी।
जिम्मेदारी निभाए डाक्टर दुर्गेश ने कहा कि अस्पताल में डाक्टर जोखिम उठाकर संक्रमित मरीजों का इलाज कर रहे हैं। यह सराहनीय कार्य है, लेकिन अगर इमरजेंसी है, तो उन मरीजों का ख्याल भी रखना चाहिए। दो घंटे इंतजार के बाद भी डाक्टर इंजेक्शन लगाने नहीं आए, जिसकी वजह से मेरे मामा की मौत हो गई। अस्पताल में मरीजों के साथ आने वाले स्वजन ही स्टेचर उठा रहे हैं। आधे से ज्यादा काम स्वजन ही कर रहे हैं। इसके बाद भी इमरजेंसी जैसी स्थिति में डाक्टर अस्पताल नहीं पहुंचकर अपनी जिम्मेदारी से दूर हो रहे हैं। इसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। इस संबंध में अस्पताल की डीन डा. रेणुका गहिने ने कहा कि डाक्टरों से जानकारी ले रहे हैं। ऐसी कोई बात नहीं है। बेहतर व्यवस्था के साथ मरीजों का इलाज किया जा रहा है।
