▶️ राज्य सरकार व जिला प्रशासन की लापरवाही के चलते व्यवस्था में नहीं हो रहा है सुधार
राजनांदगांव । कोरोना वायरस संक्रामक शहर सहित पूरे जिले में जितनी तेजी से फैल रहे हैं, मेडिकल कॉलेज व हॉस्पिटल बसंतपुर स्वयं बीमार समस्याओं से ग्रसित स्टाफ की कमी उपकरण की कमी बेड की कमी ऑक्सीजन की कमी जैसे विभिन्न जरूरी वस्तुओं को नजर अंदाज करने के कारण आज समस्याओं का अंबार लगा है, किसी को अधीक्षक पद से हटा देने से क्या समस्या हल होगा नहीं सिस्टम में सुधार करना जरूरी है, जिला पंचायत क्षेत्र क्रमांक 09 के जिला पंचायत सदस्य व आबकारी विभाग समिति के सलाहकार राजेश श्यामकर ने राज्य सरकार के साथ जिला प्रशासन को आड़े हाथ लेते हुए बताया कि मेडिकल कॉलेज अधीक्षक प्रदीप बेक को मेडिकल कॉलेज की व्यवस्था को दुरुस्त करने में सक्षम नहीं होने के कारण अधीक्षक पद से हटा दिए हैं, क्या डॉक्टर संदीप चंद्राकर को व्यवस्था को दुरुस्त कर पाएगा, यह आने वाले समय में ही पता चलेगा क्योंकि राजनांदगांव मेडिकल कॉलेज सहित पूरी छत्तीसगढ़ राज्य में स्वास्थ्य अमला समस्याओं उपकरणों व विभिन्न समस्याओं से घिरे हुए हैं, जो छत्तीसगढ़ सरकार स्वयं जानते हैं, और समझते हैं, इसके बाद भी राजनांदगांव का मेडिकल कॉलेज अधीक्षक डॉ प्रदीप बेक को हटाकर सिर्फ अपना खानापूर्ति किए हैं। श्री श्यामकर ने आगे बताया कि जिस समय कोरोना वायरस संक्रामक की संख्या मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में कम मरीज आ रहे थे, उसी समय संक्रामक की गति को भागाते हुए पहले से हॉस्पिटल कॉलेज को चुस्त – दुरुस्त पर्याप्त उपकरण बेड ऑक्सीजन के साथ पर्याप्त स्टाफ की पूर्ति कर लेना था, जो आज गरीब बेसहारा मजदूर वर्गों को कोरोना वायरस संक्रामक में बसंतपुर हॉस्पिटल मेडिकल कॉलेज व जिले के किसी भी स्वास्थ्य केंद्र में एक बेहतर इलाज सुविधा मिलते लेकिन जिला प्रशासन व राज्य शासन जानबूझकर विषम परिस्थितियों को आमंत्रित करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं, जिसका परिणाम मेडिकल कॉलेज डॉक्टर प्रदीप को हटाकर जनता के सामने अपना श्रेय लूटने का ढिंढोरा पीट रहे हैं, कुछ दिन पहले महापौर श्रीमती हेमा देशमुख ने वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से मेडिकल कॉलेज की समस्याओं व मरीजों की भोजन की गुणवत्ता के संबंध में मुख्यमंत्री को अवगत किए हैं, यह बहुत ही अच्छी बात है, महापौर मैडम जी ने अपना जागरूकता और जिम्मेदारी का परिचय दिया लेकिन क्या नगरी निकाय क्षेत्र में कोरोना वायरस गाइडलाइन का पालन नगर निगम कड़ाई से कर रहे हैं, या करवाने में सक्षम है, यहां तो दिया तले अंधेरा जैसे हैं, अपने शहर की व्यवस्था को सुधारने में स्वयं नगर पालिक निगम सक्षम नहीं है, ना महापौर सक्षम होने का परिचय नहीं दे पा रहे हैं, और मेडिकल कॉलेज की समस्याओं को मुख्यमंत्री को अवगत करा रहे हैं, यह दुर्भाग्य की बात है, नगर पालिक निगम में खुद व्यवस्था दुरुस्त नहीं है, जिसके कारण शहर में लॉकडाउन का कड़ाई से पालन नहीं हो रहे हैं, जिन किराना दुकानों को होम डिलीवरी करना चाहिए किराना व्यवसाय लोग अपना दुकान का शटर खोलकर लोगों को खुलेआम बिना मास्क बिना सोशल डिस्टेंस बिना करोना वायरस गाइडलाइन पालन किए बगैर सामान दे रहे हैं, क्या यह नगर पालिक निगम को नहीं दिखता आज शहर में जितना भी कोरोना वायरस संक्रामक तेजी से बढ़ रहे हैं, इसके लिए खुद नगर पालिक निगम जिम्मेदार है, किसी को किसी पद से हटा देने से कोई समस्या का हल नहीं होता समस्याओं का हल करने में क्यों सक्षम नहीं है, क्या पर्याप्त मात्रा में राशि नहीं मिल रहे हैं, या सहयोग नहीं मिले हैं, राज्य शासन का यहां गंभीरता से सोचना था, अगर राज्य शासन का पैसा पर्याप्त मात्रा में मेडिकल कॉलेज स्वास्थ्य सुविधा के लिए मिल रहे हैं, और उसका दुरुपयोग किए जा रहे हैं, और अधीक्षक अपनी जिम्मेदारी से काम नहीं कर पा रहे हैं, तो हटाने के बजाय निलंबित करना चाहिए क्योंकि महापौर जी ने मेडिकल कॉलेज की भोजन व्यवस्था की प्रश्न बहुत अच्छे से मुख्यमंत्री के सामने रखे हैं, लेकिन यह व्यवस्था जब से कोई नई संक्रामक बढे हैं, तब से अव्यवस्था का आलम है, पहले यहां प्रश्न क्यों नहीं उठाए थे, यहां भी एक प्रश्न चिन्ह है, डोंगरगांव विधानसभा के स्थानीय हॉस्पिटल में संक्रमित से मृत्यु व्यक्ति को कचरा ढोने की गाड़ी में श्मशान घाट ले जा रहे हैं, यहां तो भी राजनांदगांव जिला के लिए बहुत शर्मनाक घटना है, यह घटना को भी मुख्यमंत्री के सामने लाना था, यह शर्मनाक लापरवाही घटना को वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से मुख्यमंत्री को क्यों नहीं बतलाए गए। प्रदेश के कांग्रेसी सरकार को राजनांदगांव सहित जिले से कोई मतलब नहीं है, इसलिए यहां की स्वास्थ्य सुविधा बेहाल बदतर स्थिति में है, इसके लिए स्वयं राज्य सरकार के साथ जिला प्रशासन जिम्मेदार है, उन्होंने यह भी कहा कि डोंगरगढ़ और घुमका के ग्रामीण क्षेत्रों में भी स्वास्थ्य सुविधा की लचर व्यवस्था है, जिसका सुध लेने वाला भी कोई नहीं है।
