खैरागढ़ । लापरवाही जान पर भारी पड़ रही है। बावजूद इसके कोरोना गाइडलाइन और धारा 144 का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है। कंटेनमेंट जोन में दुकाने बंद हैं और जहां दुकानें खुली हैं वहां न तो दुकानदार के और न ही ग्राहकों के चेहरों पर मास्क दिख रहा है। सैनिटाइजर भी गायब है और बेधड़क दुकानदारी हो रही है। इसका कारण यही है कि आने वाले 19-20 तारीख से इलाके में सैकड़ों की संख्या में शादी है। दान-दहेज को लेकर खरीदारी करना स्वजनों के लिए जितना जरूरी है, उतना ही कंटेनमेंट जोन के चलते बंद दुकानों का फायदा उठाना दुकानदार के लिए। शायद इसलिए भी शासन प्रशासन की लाख कोशिशों के बाद भी इलाके में कोरोना का ग्राफ कम नहीं हो रहा है। रोज सैकड़ों नए मरीज मिल रहे हैं। मरने वालों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है। बुधवार को दो बुजुर्ग महिलाओं और एक अधेड़ की मौत के साथ कोरोना से मरने वालों की संख्या सालभर मे 40 हो गई है। इनमें से 20 की मौत 17 मार्च से अप्रैल के पहले सप्ताह तक हुई। 31 मार्च को मरकामटोला सीएचसी मे एंटीजन टेस्ट में पाजिटिव निकली 70 साल की बुजुर्ग महिला बिरजा बाई होम आइसोलेशन में थी, दो अप्रैल को तबीयत ज्यादा खराब होने पर स्वजन राजधानी के निजी अस्पताल लेकर गए, जहां से पांच अप्रैल को उसे वापस लौटा दिया गया था, दो दिन घर में रहने के बाद सात अप्रैल की रात को उसकी मौत हो गई।
चिन्हांकित होने के दो दिन के भीतर दो की मौत छह अप्रैल को एंटीजन टेस्ट मे संक्रमण की पुष्टि बाद टेमरी घुमका के 47 साल के अधेड़ जगदेव साहू को पालीटेक्निक कोविड केयर सेंटर में रखा गया था। 24 घंटे के भीतर सांस लेने में दिक्कत के चलते उसकी तबीयत ज्यादा खराब हुई। जिला या अन्य किसी जगह अस्पताल मे बेड खाली नहीं मिला। उसके बाद भी स्वास्थ्य विभाग उसे बचाने की हर संभव कोशिश में लगा रहा, लेकिन गुरुवार की सुबह उसकी सांस उखड़ गई। वहीं दाऊचौरा वार्ड की 65 साल की महिला बिसाहिन बाई सर्दी खांसी के चलते सिविल अस्पताल पहुंची, जहां एंटीजन टेस्ट में पाजीटिव मिलने पर होम आइसोलेट थी। दोपहर को सांस लेने में दिक्कत हुई तो आनन फानन मे मेडिकल कालेज पेंड्री भेजा गया, जहां इलाज के दौरान रात में ही उसकी मौत हो गई। तीन की मौत के साथ बीते 22 दिनों मे इलाके में कोरोना से 20 लोगों की मौत हुई है। इसके बावजूद संक्रमण से बचाव को लेकर लोगों में लापरवाही देखी जा रही है। शादी विवाह के सीजन के चलते लोग बाजार में उमड़ रहे हैं और दुकानदार भी पढ़े लिखे होने के बावजूद निहित आर्थिक लाभ के लिए सामान के साथ जान का सौदा करने पर आमदा है।
