राजनांदगांव । शहर से लगे पनेका बांकल गांव में रेत का अवैध उत्खनन कराने के लिए गांव वालों ने समिति बना ली है। यह समिति बकायदा रायल्टी पर्ची की ही तरह रसीद काट रही है। तस्करों ने इसके लिये गांव के कुछ प्रमुख लोगों को अपने खेमे में कर लिया है ताकि कोई विरोध न हो।
खनिज विभाग की रायल्टी पर्ची के बिना ही शिवनाथ नदी से हर दिन रीब 40 ट्रक रेत निकाली जा रही है। घाट लीज पर है, लेकिन सीमा लांघकर रेत निकाली जा रही है। इस पर ग्राम पंचायत ने शनिवार को कलेक्टर से मिलकर आपत्ति दर्ज कराई। कलेक्टर ने पंचायत पदाधिकारियों को जांच का भरोसा दिलाया है। पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के अनुसार नदी से रेत का उत्खनन मशीनों से नहीं किया जाना है, लेकिन यहां हर दिन छह मशीनरी गाड़ियों से बेखौफ उत्खनन किया जा रहा है। इससे नदी के स्वरूप पर भी विपरित असर पड़ने लगा है। बारिश के दिनों में यह नदी की दिशा भी बदल सकती है। बताया गया कि घाट से स्थानीय लोगों को रियायत दर पर रेत दी जानी है, लेकिन ठेकेदार गांव वालों को ही महंगे दाम पर रेत दे रही है।
ग्राम पंचायत के अनुसार शिवनाथ नदी से लगे खसरा नंबर 406 को लीज पर दी गई है। यह करीब 12 एकड़ है, लेकिन वहां से नाममात्र के लिए उत्खनन किया जा रहा है। ठेकेदार उससे लगी दूसरी जगह से ही ज्यादातर रेत निकाल रहा है। वहां 22 एकड़ अतिरिक्त क्षेत्र में उत्खनन की शिकायत है। जिस हिस्से से रेत निकाली जा रही है, वहां करीब 15 फीट तक रेत है। इतनी रेत का रायल्टी के रूप में शासन को करोड़ों रुपये की राजस्व आय हो सकती है, लेकिन बिना रायल्टी पर्ची के की जा रही खोदाई से यही राशि ठेकेदार हजम कर रहा है। प्रशासन सीमांकन कराए तो दूध व पानी साफ हो सकता है।
अगर शासन ने किसी को रेत घाट की लीज दी है तो अच्छी बात है। पंचायत को इससे कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन नियमानुसार खनिज विभाग में जरूरी राशि जमा कर रायल्टी पर्ची ले। उसी के आधार पर रेत निकाले। गांव में किसी समिति को पर्ची काटने का कानूनी अधिकार नहीं है। हमने कलेक्टर को वस्तुस्थिति से अवगत करा दिया है। आगे प्रशासन जाने।
भरत पटेल, सरपंच, पनेका-बांकल
खदान को लेकर कोर्ट में मामला रहा होगा। अभी-अभी क्लीयर हुआ है। खदान का संचालन तो विधिवत ही करना होगा। रायल्टी के बिना उत्खनन नहीं कर सकते। क्या स्थिति है चेक करा लेता हूं।
टीके वर्मा, कलेक्टर
