राजनांदगांव । शहर के शासकीय कमला देवी राठी महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय की प्राचार्य डा. सुमन सिंह बघेल के मार्गदर्शन में राजनीति विज्ञान विभाग में अतिथि व्याख्यान का आयोजन किया गया। प्रचार्य ने छात्राओं को संसदीय शासन की उपयोगिता के संबंध में बताया। शासकीय महाविद्यालय डोंगरगांव व दिग्विजय महाविद्यालय की प्रचार्य डा. बीएन मेश्राम ने बताया कि भारत ने आजादी हासिल करने के बाद संसदीय शासन प्रणाली की ऐतिहासिक नींव रखी। यह एक लोकतांत्रिक राजनीतिक व्यवस्था है, जहां सर्वोच्च शक्ति लोगों के प्रतिनिधियों के निकाय में होती है। इसे संसद कहते हैं। संसद ही देश की राजनीतिक व्यवस्था की बुनियाद है। भारत की संसद राष्ट्रपति और दो सदनों राज्य सभा और लोकसभा से मिलकर बनती है। उन्होंने संसदीय शासन प्रणाली की विशेषताओं के बारे में भी बताया। संसद संसदीय शासन कानून निर्माण का केंद्र बिंदु होती है। पूरे देश का प्रशासन संसद के अनुसार संचालित होता है। इस में राष्ट्रपति संसदीय चुनाव में बहुुमत प्राप्त दल के नेता को प्रधानमंत्री नियुक्त करता है और प्रधानमंत्री की सलाह से अन्य मंत्रियों को नियुक्त की जाती है।
उन्होंने कहा कि संसदीय शासन प्रणाली में उत्तरदायी शासन होता है, क्योंकि संसद के सदस्य मंत्री परिषद के सदस्यों से प्रश्न पूछकर, ध्यानाकर्षण, निंदा व अविश्वास प्रस्ताव के माध्यम से उन्हें संसद के प्रति उत्तरदायी बनाते हैं। यदि मंत्रि परिषद संसद में बहुमत खो देती है तो उसे त्याग-पत्र देना पड़ता है। यह प्रणाली जनता को राजनीतिक शिक्षा प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है। इससे विभिन्ना दल अपनी नीतियों और कार्यक्रमों को आम जनता के सामने रखते हैं।
विपक्षी दल सरकार की कमियों को लगातार जनता के सामने रखते हैं। जनता में राजनीतिक चेतना का विकास करने में ये सफल होते हैं। भारत संसदीय शासन प्रणाली का सर्वोत्तम उदाहरण है। डा. बीएन मेश्राम ने व्याख्यान दिया। कार्यक्रम में महाविद्यालय की प्राचार्य डा. सुमन सिंह बघेल विभागाध्यक्ष, आबेदा बेगम और डॉ. दुर्गा शर्मा अतिथि व्याख्याता व बड़ी संख्या में छात्राएं उपस्थित रहीं।
