राजनांदगांव . शहर में प्रदूषण का खतरा बढ़ गया है । वाहनों के साइलेंसर से निकलने वाले काले धुएं से हवा और अधिक प्रदूषित हो रही है। इस पर न कभी परिवहन विभाग ध्यान देता है और न ही पुलिस। बिना प्रदूषण प्रमाण पत्र के कई वाहन काले धुएं छोड़ते हुए शहर में दौड रहे हैं। अगर विभाग जांच करे तो आधे से अधिक वाहन चालकों के पास प्रदूषण जांच प्रमाण पत्र नहीं मिलेगा ।हजारों वाहन जहरीला धुआं उगलते दौड़ रहे हैं पर वाहनों का प्रदूषण मापने का अभियान विभाग की ओर से नहीं चलाया जा रहा है। प्रदूषण जांच के नाम पर केवल वाहनों का प्रदूषण प्रमाण पत्र चेक किया जाता है। गंभीर बात तो यह है कि धुआं उगलते वाहनों का भी प्रदूषण पत्र बना दिया जाता है। प्रदूषण प्रमाण पत्र बनवाने के लिए निर्धारित फीस जमा करते ही प्रमाण पत्र बन जाता है। इसके लिए कोई विशेष जांच नहीं की जाती।एक ओर वाहनों के धुएं से शहरवासियों का दम घुट रहा है और दूसरी ओर सुबह-सुबह कूड़े में लगाई गई आग से उठते धुएं में सांस लेना मुश्किल हो जाता है। यह रोज का हाल है। सुबह होते ही वाहनों की भीड़ ऐसी हो जाती है कि सड़कों की चौड़ाई कम पड़ जाती है। जर्जर और काला धुआं उगलते वाहनों ट्रैफिक वालों के सामने से फर्राटे भर रहे हैं।
चिकित्सकों का कहना है कि वायु प्रदूषण से बीमार व बुजुर्ग लोगों की परेशानी बढ़ने लगी है। छोटे छोटे बच्चे भी वायु प्रदूषण से प्रभावित हो रहे हैं। नगरवासियों का कहना है कि पुलिस विभाग ऐसे वाहनों के खिलाफ अभियान नहीं चला रहा, बस खानापूर्ति कर रहा है। सिर्फ यातायात सप्ताह आता तभी वाहनों की जांच की जाती है। विभाग को चाहिए की हर दो माह में गाड़ियों की जांच करे तभी प्रदूषण कुछ हद तक कम हो सकता है।
