राजनांदगांव. शासकीय कमलादेवी राठी महिला महाविद्यालय राजनांदगांव के स्नातकोत्तर भूगोल विभाग द्वारा संस्था प्राचार्य डॉ. सुमन सिंह बघेल के प्रमुख निर्देशन में प्रदेश के सर्वप्रमुख पर्वतीय पर्यटन स्थल मैनपाट पर विशेष जानकारी परख व्याख्यान आयोजित किया गया। विभागाध्यक्ष कृष्ण कुमार द्विवेदी ने उक्त व्याख्यान में मैनपाट को प्राकृतिक पर्यटन का रमणीय स्थल बताते हुए विषयक छात्राओं को उल्लेखनीय रूप से बताया कि प्रदेश के सरगुजा मुख्यालय से पचहत्तर किलोमीटर दूरी पर पठारीय भाग में स्थित मैनपाट एक मात्र ऐसा पर्यटन स्थल है जो समुद्र तल से चार हजार फुट ऊंचा है। यहां स्थित एक सौ पचास फुट ऊंचा सरभंजा जलप्रपात इसके नैसर्गिक सौंदर्य को और अधिक द्विगुणित कर देता है। रिहन्द नदी के उदगम स्थल मतिरिंगा पहाड़ सघन साल वन छोटे बड़े सुंदर झरने, टाईगर पाइंट, मछली पाइंट, मिल्की वे, परपटिया, उल्टा पानी तथा अनुपम प्राकृतिक कारीगरी की प्रतीक बंदरकोट, राकामांड्रा गुफाएं छत्तीसगढ़ / मध्यभारत का शिमला कहे जाने वाले ”मैनपाटÓÓ को एक शानदार पर्यटन हिल-स्टेशन बनाते हेैं। उल्लेखनीय है कि रॉकक्लाईबिंग तथा रेम्पलिंग जैसे ऐडवेंचर स्पोर्ट्स के लिए सहज, सुलभ मैनपाट, तिब्बितयों शरणार्थियों की अनूठी संस्कृति, बस्ती तथा अन्य आकर्षक बौद्ध मंदिर इसे और अधिक सुंदर, सांस्कृतिक, प्राकृतिक पर्यटन का आदर्श क्षेत्र बनाते हैं। प्राध्यापक द्विवेदी ने आगे विशेष रूप से बताया कि यहां का शांत वातावरण सघन-गहन, वन प्रांतर, कल-कल नांद करते झरने-प्रपात, नैसर्गिंक सौंदर्य से सहज परिपूर्ण दृश्य आदि सभी वर्तमान में अतिभौतिकवादी नगरीय-महानगरी, जीवनशैली से पीडि़त व्यक्तियों के लिए तथा प्रकृति प्रेमियों के लिए मैनपाट की सैर में बिताए आनंद मंगल के क्षणों को उन्हें जीवनभर स्मृत रखने के साथ-साथ प्रकृति के साथ अनुकूलन की महत्तम प्रेरणा भी प्रदत्त कराता है। आईये ज्ञान और मनरंजन के प्रमुख आधार प्राकृतिक पर्यटन के लिए वर्ष में स्वदेशी स्थलों के लिए अवश्य कुछ समय निकालें और देश-प्रदेश की धरती के अद्भुत, अनुपम नजारों को देखें, जाने और समझे और जीवन को खुशहाल रखने का श्रेष्ठ, श्रेयष्कर मंत्र प्रकृति के सौंदर्य का पान ही अमृत है तो स्वीकार करें।
समाचार रूप में फोटो सहित सधन्यवाद प्रेषित ।
प्रो. कृष्ण कुमार द्विवेदी
