March 16, 2026

छत्तीसगढ़

गरियाबंद -समूह की ताकत,एकता और दृढ़ विश्वास से जीवन को बदला जा सकता है। जो कार्य अकेले में असंभव जान पड़ता है उसे समूह के समर्थन और मार्गदर्शन से ही संभव बनाया जा सकता है। मजदूरी और अपने घर में काम करने वाली महिलाओं के लिए ज्यादा दूर की सोचना इसलिए भी संभव नहीं हो पाता, क्योंकि उनके पास संबल देने वाला कोई नहीं होता। जिले के छुरा विकासखंड अंतर्गत ग्राम लोहझर की तोरण बाई चक्रधारी के साथ भी ऐसे ही कुछ हो रहा था। तभी उन्हें बिहान से जुड़ने का अवसर मिला। पूजा एकता स्वयं सहायता समूह से जुड़कर उनका मनोबल ऊंचा हुआ। पहले केवल घर का चैका-बर्तन और बाहर मजदूरी को ही अपनी दुनिया मानकर चली थी। उन्हें अपने भीतर छुपे हुनर का अंदाजा नहीं था। घर में पति युवराज चक्रधारी मिट्टी से परंपरागत बर्तन, मूर्ति और अन्य सजावटी वस्तुएं बनाते थे। तोरण केवल समय-समय पर हाथ बटाती थी। समूह में आने-जाने से उनकी अंदर की प्रतिभा उभर कर सामने आयी। गरीबी के कारण पति के इस कला को पहचान नहीं मिल पा रही थी। तभी समूह से 30 हजार रूपये का ऋण लेकर इस कला को आगे बढ़ाया। बाजार और सीजन के मांग के अनुरूप मिट्टी के कलात्मक वस्तुएं बनाना प्रारंभ किया और इसमें स्वयं तोरण बाई ने हाथ बटाया। आज पिछले 02 वर्षो से मिट्टी के बर्तन और मूर्ति की बिक्री से इनके आर्थिक स्थिति में काफी सुधार आया है। गर्मी के मौसम में मटका बेचकर 15-20 हजार रूपये का आय होता है। वहीं त्यौहार के मौसम में मूर्ति बनाकर भी 35-40 हजार रूपये का आय हो जाता है। अभी गणेश मूर्ति विक्रय हेतु छुरा में स्टाल भी लगाए हैं। जिससे अच्छी बिक्री की उम्मीद है। तोरण बाई बताती है कि वे समूह में आजीविका के साथ बचत करना भी सीख गई है। अब वे पेंट मशीन लेने की सोंच रहे है। इसे भी समूह के माध्यम से लूंगी। आय से उनके समृद्धि के द्वार खुल गए है। अब समूह में माताजी और बहू को भी जुड़ गये हैं। छुरा जनपद के सीईओ रूचि शर्मा ने बताया कि तोरण बाई को प्रशिक्षण देकर उसके कला में और निखार लाया जायेगा। बिहान के डी.पी.एम रमेश वर्मा बताते है कि उनके बनाये गए मिट्टी के वस्तुओं को और अधिक कलात्मक बनाकर बड़ा बाजार उपलब्ध कराने के लिए प्रयास किया जा रहा है।
रायपुर-राज्य के दूरस्थ अंचल जहां पर बिजली सुविधा की उपलब्धता में कठिनाई हो रही है वैसे विद्युत...
सुकमा,गांवों में बने गोठान जहां आंवारा पशुओं की आश्रयस्थली बन गए हैं, वहीं यहां बनाए गए चारागाहों से पशुओं को पौष्टिक हरा चारा भी मिल रहा है। सुकमा जिले में अब तक 40 गोठानों का निर्माण पूरा हो चुका है। इनमें डेढ़ लाख नेपियर रुट लगाई जा रही है, जिससे पशुओं को आसानी से हरा चारा उपलब्ध हो सके। गोचर भूमि के अतिक्रमण होने के कारण पशुधन को हरा चारा उपलब्ध नहीं हो पाता था, जिसके कारण पशुओं व्दारा फसलों को नुकसान पहुंचाया जा रहा था। इस गंभीर समस्या से किसानों को हो रहे नुकसान से बचाने एवं पशुधन को हरा चारा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार व्दारा सुराजी गाॅंव योजना अन्तर्गत नरवा, गरूवा, घुरवा एवं बाड़ी योजना संचालित की जा रही है।  योजना अंतर्गत गौठान निर्माण किया जा रहा है, जिसमें चारागाह का निर्माण भी किया जा रहा है। चारागाह हेतु आरक्षित भूमि को तार या बाड़ा फेंसिंग कर सिंचाई की सुविधा उपलब्ध करायी जा रही है, जिससे चारागाह में हरा चारा जैसे- नेपियर, फसल का विकास किया जा सके।गौठान में चाॅफ कटर की भी व्यवस्था की जा रही है, जिससे चारा का समुचित उपयोग हो सके। चारागाह में उत्पादित हरे चारे की कटाई कर गौठानों में आने वाले पशुओं का हरा चारा उपलब्ध कराना मुख्य उद्देश्य है। डाॅ.एस.जहीरूद्दीन (उपसंचालक) पशुधन विकास विभाग सुकमा ने बताया कि नेपियर घास को लगाने के बाद पशुआंे को पूरे वर्ष भर हरा चारा उपलब्ध होगा। इस घास की रोपाई के बाद एक से डेढ़ महीनों में हरा चारा उपलब्ध हो सकेगा। इस घास से करीब 5 वर्ष तक हरा चारा उपलब्ध रहता है। इस घास में रसीलापन, घनी पत्तियाॅं उच्च प्रोटीन  कार्बोहाईड्रेट रहता है। इसका उत्पादन प्रति हेक्टेयर 100 से 160 टन होता है। नेपियर घास प्रथम कटाई के लिए बुआई के लगभग 70 दिन पश्चात् तैयार होता है तथा इसके 35-45 दिन के अंतराल में कटाई की जाती है। पौधे जमीन से लगभग 8 से 10 सेमी की ऊंचाई से काटी जाती हैं। नेपियर घास में प्रतिवर्ष 6 से 7 कटाई मिलती है। पशुओं को हरा चारा उपलब्ध कराने की दृष्टि से गोठानों के पास चारागाह स्थल कर चयन कर नेपियर रूट निःशुल्क रोपणी गोठानों में महिला स्व.सहायता समूह व्दारा किया जा रहा हेै, ताकि पशुओं को नियमित रूप से हरा चारा उपलब्ध हो सके। यह हरा चारा पशु प्रजनन प्रक्षेत्र चंदखुरी रायपुर से प्राप्त कर रोपण की कार्यवाही प्रत्येक गौठान में की जा रही है।
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