गायत्री शक्तिपीठ में पंचमी पर वेदमाता का हुआ सतरंगी पुष्प श्रंगार
शाम को सैकड़ों दीपों से वैदिक मंत्रोच्चार के बीच दीप यज्ञ आयोजित
राजनांदगांव / शहर के स्थानीय गायत्री शक्तिपीठ में नवरात्र पंचमी के अवसर पर जहां वेदमाता गायत्री की सात रंग के पुष्पों से सतरंगी श्रंगार कर विधि विधान के साथ पूजा-अर्चना की गई और महाआरती कर सब की खुशहाली की दुआएं मांगी ,वहीं शाम को छह बजे वैदिक मंत्रोच्चार के बीच सैकड़ों दीपों के साथ दीप यज्ञ आयोजन किया गया जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने अपने हाथों से दीप प्रज्ववलन कर तमसो मा ज्योतिर्गमय की प्रकाश बिखेरा।
गायत्री शक्तिपीठ के ट्रस्टी बृजकिशोर सुरजन व सूर्यकांत चितलांग्या ने बताया कि नवरात्र काल शक्ति आराधना उपासना का काल होता है। आदि शक्ति वेदमाता मां गायत्री की शक्ति साधना ,आराधको-उपासकों में दिव्य गुणों एवं अपरिमित शक्ति का भंडार भर देती है। यही वजह कि साधक जन नवरात्रि मे गायत्री मंत्र जाप से लेकर मंत्र लेखन,व्रत उपवास जप -तप कार्य में रत रहते हैं। गायत्री शक्तिपीठ में यह कार्य नवरात्रि के प्रथम दिन 15 अक्टूबर से जारी है। यहां प्रतिदिन यज्ञ अनुष्ठान का कार्य पूरे विधि विधान के साथ किया जा रहा है। इसके चलते पूज्य गुरुदेव श्री राम शर्मा आचार्य व वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा के सूक्ष्म सान्निध्य में मां गायत्री के साधकों -उपासको को कृपा प्रसाद की प्राप्ति हो रही है। जिसका लाभ समस्त साधको उपासकों को हो रहा है।
शक्तिपीठ परिव्राजक ओमप्रकाश जी ने बताया कि मंदिर में नवरात्रि के दिनों रोजाना यज्ञ अनुष्ठान के साथ विभिन्न संस्कार संपन्न किए जा रहे हैं। साथ ही उन्होंने बताया कि जिस किसी गायत्री परिजन का देहावसान हो जाता है तो उनके यहां शक्तिपीठ की ओर से तत्काल मंत्र लिखित पितांबरी व हार फूल के साथ हवन सामग्री भिजवाया जाता है। मंदिर के पुरोहित जनों द्वारा मृतक के वैदिक मंत्रोच्चार के साथ अंतिम संस्कार की सुविधा प्रदान की जाती है।
उन्होंने बताया कि गुरुवार को नवरात्रि पंचमी के दिन वेदमाता गायत्री की भक्त जनों द्वारा अपने हाथों से सतरंगी पुष्प से श्रंगार किया वहीं संध्या काल में आयोजित सैकड़ों दीपों की महाआरती व दीपयज्ञ में एक एक दीप जलाकर लोगो ने मां की पंचमी श्रृंगार में श्रद्धा के पूष्प अर्पित की।अंत में प्रसादी का वितरण किया गया। उक्ताशय की जानकारी शक्ति पीठ के पुजारी ब्रह्मानंद ने दी है।
