रायपुर- बोधघाट परियोजना को लेकर शनिवार को सीएम भूपेश बघेल ने बड़ी बैठक की। इसमें बस्तर सांसद, सभी विधायक और अन्य जनप्रतिनिधियों ने सुझाव दिया कि परियोजना शुरू होने से पहले पुनर्वास नीति बनना चाहिए। सीएम बघेल ने कहा कि बस्तर के लोगों को विश्वास में लेकर योजना को आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रभावित लोगों के रोजगार, मकान और जमीन के बदले जमीन की व्यवस्था की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि बोधघाट ऐसा पहला प्रोजेक्ट है, जो बस्तर के विकास और समृद्धि के लिए है। इसका सीधा फायदा बस्तरवासियों को मिलेगा। 40 वर्षों से लंबित परियोजना पहले बस्तर और वहां के लोगों के जरूरतों के अनुकूल नहीं थी। इस परियोजना में आमूलचूल परिवर्तन कर इसे सिंचाई परियोजना के रूप में तैयार किया गया हैै। जिसका लाभ बस्तर संभाग के अधिकांश क्षेत्र के ग्रामीणों और किसानों को मिलेगा। बैठक में पूर्व केन्द्रीय मंत्री अरविन्द नेताम को भी आमंत्रित किया गया था। वे पहले इस परियोजना का विरोध करते रहे हैं। इन सभी ने बोधघाट परियोजना पर अपनी मुहर लगा दी है। पूर्व केन्द्रीय मंत्री नेताम ने कहा कि वे इस परियोजना के विरोधी रहे हैं। चूंकि अब सिंचाई प्राथमिकता है, इसलिए यह जरूरी है। उन्होंने खुशी जाहिर की कि उनका सौभाग्य है कि वे फिर नीति बनाने के लिए बैठे हैं। बोधघाट परियोजना से बस्तर संभाग के अत्यंत पिछड़े जिले सुकमा, दंतेवाड़ा और बीजापुर में सिंचाई की सुविधा विकसित होगी। यह भी सुझाव दिया कि छोटा सा हाईडल पॉवर प्लांट भी लगना चाहिए। ताकि बाकी जिलों में बिजली की आपूर्ति हो सकेगी। इस परियोजना के पूरा होने से सवा तीन लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई होगी। आबकारी मंत्री ने कहा कि आम लोगों के बीच जाकर भी सुझाव लिए जाएंगे।
मंत्रियों के सुझाव- आकर्षक पुनर्वास पैकेज और प्रभावितों के लिए व्यवस्थापन नीति बनेजल संसाधन मंत्री रविन्द्र चौबे ने कहा कि इससे बस्तर की अर्थव्यवस्था में बदलाव आएगा। उन्होंने आकर्षक पुनर्वास एवं व्यवस्थापन की नीति तैयार करने का सुझाव दिया। वन मंत्री मो. अकबर ने प्रोजेक्ट को चरणबद्ध तरीके से पूरा करने का सुझाव दिया, जिस पर सीएम बघेल ने इसका परीक्षण कराने की बात कही। उद्योग मंत्री कवासी लखमा ने कहा कि परियोजना से प्रभावितों को बताना होगा कि उनको क्या लाभ मिलेगा। साथ ही प्रोजेक्ट शुरू करने से पहले व्यवस्थापन के लिए जमीन का चिन्हांकिंत किया जाए।राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने कहा कि आम जनता से चर्चा कर पुनर्वास नीति तय की जाएगी।
300 मेगावाट बिजली, 3.66 लाख हेक्टेयर में होगी सिंचाईइससे पहले जल संसाधन विभाग के सचिव अविनाश चंपावत ने पावर-प्वाइंट प्रजेंटेशन के जरिए बताया कि इससे बस्तर की इकोनॉमी में 6 हजार 223 करोड़ रुपए की बढ़ोत्तरी होगी। छत्तीसगढ़ इंद्रावती नदी के 300 टीएमसी जल का उपयोग कर सकता है। वर्तमान में मात्र 11 टीएमसी जल का उपयोग हो रहा है। इससे 3 लाख 66 हजार हेक्टेयर में सिंचाई और लगभग 300 मेगावाट विद्युत का उत्पादन होगा। इसके 500 मिलियन घनमीटर जल का उपयोग उद्योग और 30 मिलियन घनमीटर पेयजल के लिए उपयोग में लाया जाएगा। इससे हर साल 4824 टन मछली का भी उत्पादन हो सकेगा। इस प्रोजेक्ट से 359 गांव लाभान्वित होंगे, जिसमें दंतेवाड़ा के 51, बीजापुर के 218 और सुकमा के 90 गांव शामिल हैं। साथ ही प्रोजेक्ट से 28 गांव पूरी तरह और 14 गांव आंशिक रूप से डूबान में आएंगे। इसमें 5704 हेक्टेयर वन, 5010 हेक्टेयर निजी तथा 3068 हेक्टेयर शासकीय जमीन शामिल हैं।
