जबलपुर
देश में मातृ मृत्यु दर व शिशु मृत्यु दर को कम करने जिला अस्पताल, सीएचसी, सिविल अस्पताल से लेकर मेडिकल कॉलेज के लेबर रूम व आॅपरेशन थियेटर तक की गुणवत्ता सुधार के लिए शुरू किए गए केंद्र सरकार के ‘लक्ष्य’ प्रोग्राम में प्रदेश के 6 मेडिकल कॉलेज शामिल हो गए हैं। इसमें जबलपुर, रीवा, सागर, ग्वालियर, इंदौर व भोपाल मेडिकल कॉलेज स्टेट असेस्मेंट का पड़ाव पार कर चुके हैं।
‘लक्ष्य’ प्रोग्राम के तहत स्पर्धा में शामिल मेडिकल कॉलेजों में फायनल असेस्मेंट के लिए अधिकारियों की टीम एनक्यूएएस (राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक) के इंस्पेक्शन करेगी। इंस्पेक्शन के बाद एनक्यूएस के निर्धारित मापदंड को पूरा करने वाले कॉलेज को ‘लक्ष्य’ से सर्टिफाइड कर सर्टिफिकेट दिया जाएगा। ‘लक्ष्य’से सर्टिफाइड होने के बाद जो मेडिकल कॉलेज 70-80 प्रतिशत के बीच अंक लाएगा उसे (गायनी विभाग) के प्रति बेड के लिए 5 हजार रुपए प्रति वर्ष, 80 से 90 प्रतिशत के बीच अंक लाने को 7 हजार रुपए व 90 से 100 के बीच वाले कॉलेज/अस्पताल को 10 हजार रुपए प्रति बेड का अनुदार सरकार देगी।
वर्ष 2020 में प्रोग्राम में शामिल हुए मेडिकल कॉलेज
बताया जाता है कि स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने 15 मार्च 2018 को लेबर रूम और ओटी गुणवत्ता पूर्ण सेवाओं एवं सुविधाओं को लेकर ‘लक्ष्य’ कार्यक्रम शुरू किया था, इसमें पहले जिला अस्पतालों, सीएचसी व सिविल अस्पताल को चिहिन्कत कर प्रमाणीकृत किया जाता है, लेकिन पिछले साल से सरकार ने इसके लिए मेडिकल कॉलेजों को अनिवार्य रूप से शामिल किया है।
इनका कहना
‘लक्ष्य’ कार्यक्रम के तहत प्रदेश के जिला अस्पतालों के साथ मेडिकल कॉलेजों को शामिल किया गया है। इनका स्टेट असेस्मेंट हो चुका है, अब फायनल असेस्मेंट के लिए सेंटर से टीमें आएंगी। फायनल असेस्मेंट के लिए सभी मेडिकल कॉलेज लक्ष्य के मुताबिक मापदंड को दुरुस्त करने में लगे हुए हैं।
डॉ. संजय मिश्रा, नेशनल असेसर ‘लक्ष्य’ व एनक्यूएस
