राजनांदगांव । भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष परवेज अहमद पप्पू ने कहा कि शहर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में भी प्राइवेट स्कूल का जाल बिछा हुआ है जिसमें पढ़े लिखे होनहार बच्चे उक्त स्कूलों में शिक्षक के रूप में काम करते हैं जिसके कारण यहां पढ़ने वाले बच्चों को अच्छी शिक्षा मिल सके इसके लिए वे बच्चों को अध्यापन करवाते हैं लेकिन लॉक डाउन होने से इन्हीं शिक्षकों को मानदेय नहीं मिलने से इनकी आर्थिक स्थिति लगभग खराब होते हुए नजर आ रही है।
अहमद ने बताया कि शहर में कुछ नामी गिनामी स्कूल जिसे हम अपने भाषा में बड़े स्कूल का दर्जा देते हैं लॉक डाउन के चलते पिछले दो माह से इन स्कूलों में ऑनलाइन पढ़ाई का मापदंड तय किया गया है लेकिन ऑनलाइन पढ़ाई कराने वाले शिक्षकों को मानदेय के रूप में आधी वेतन राशि स्कूल संचालक द्वारा दी जा रही है । इसके अलावा ऐसे बहुत से प्राइवेट स्कूल है जिसमें एक साल में दस माह पढ़ाई कराने के उद्देश्य से शिक्षकों से लिखित में आदेश ले लिया जाता है और उन्हें एक वर्ष का मानदेय देने के बजाय दस माह का मानदेय दिया जाता है इसके अलावा शहर के कुछ प्राइवेट स्कूलों में विगत दो माह का मानदेय नहीं मिलने की खबर जोरों से चल रहा है एक तरफ तो केंद्र सरकार व राज्य सरकार के द्वारा करोना वायरस महामारी के चलते लोगों ने आपने हैसियत के अनुसार दान किए हैं इसके अलावा राजनांदगांव शहर में विभिन्न संगठनों और समाजसेवियों के द्वारा यहां के लोगों को हर संभव मदद किया गया है केंद्र सरकार व राज्य सरकार के द्वारा लोगों को राहत पहुंचाने के उद्देश्य से कई योजनाएं सुचारू रूप से चालू करवाया गया है जिससे लोगों को राहत मिल सके। लेकिन प्राइवेट स्कूल संचालकों की मनमानी के चलते उक्त स्कूल में बच्चों को शिक्षा परोसने वाले शिक्षकों को वेतन नहीं मिल रहा है शिक्षकों को आज से लेकर विगत दो माह से मानदेय नहीं मिलने से इनके परिवार का भरण पोषण व इनकी आर्थिक स्थिति खराब होते हुए दिखाई पड़ रहा है प्राप्त जानकारी के अनुसार शहर में संचालित ऐसे बड़े बड़े प्राइवेट यह स्कूल है जिसमें डिपॉजिट के रूप में दो साल तक का फंड स्कूल में मौजूद रहता है इसके अलावा उक्त स्कूलों में शादी समारोह व अन्य छोटे-बड़े कार्यक्रमों के माध्यम से एक बड़ी राशि स्कूल को प्राप्त होता है चलो मान लिया जाए कि अभी लॉक डाउन है इससे पहले लॉक डाउन जैसे परिस्थितियों का सामना कभी स्कूलों को नहीं करना पड़ा है फिर ऐसे विषम परिस्थिति में अपने शिक्षकों को वेतन देने में क्यों हाथ खींच रहे हैं प्राइवेट स्कूल जबकि शिक्षकों को इस विषम परिस्थिति में अपने संस्था स्कूल व स्कूल संचालनकर्ता के ऊपर भरोसा शिक्षकों को रहता है। लेकिन प्राइवेट स्कूल के इस रवैया को देखते हुए परवेज अहमद ने शिक्षा विभाग से गुजारिश करते हुए कहा है कि ऐसे प्राइवेट स्कूलों पर सख्त से सख्त कार्रवाई किया जाए ।
