राजनांदगांव। जमातपारा निवासी साइकल से अपनी छोटी से पहचान बनाने वाले यश सोनी जी के जज्बे को सलाम। श्री सोनी जी 21 मार्च को सुबह 6 बजे सुकमा के लिए निकले और मात्र 50 घंटे में साइकल चलाते हुए सुकमा पहुंचे।
मिली जानकारी के अनुसार रात्रि में कुछ देर आराम करने के लिए पहले झीरमघाटी में विधायक महोदय संतराम नेताम के द्वारा सोनी जी को विधायक बंगले में कुछ घंटे का विश्राम कराया गया और उन्हें गन्ना रस एवं फल का सेवन कराकर विधायक महोदय ने हरी झंडी दिखाई और यात्रा की शुभकामनाएं एवं आशीर्वाद प्रदान किया। उसके बाद श्री सोनी जगदलपुर पहुंचे। वहां के लोकप्रिय पूर्व विधायक संतोष बाफना द्वारा उन्हें विश्राम करने के लिए होटल में ठहराया व फल की व्यवस्था कराई गई। फिर सुबह के 4 बजे श्री सोनी अपने साइकल से सुकमा के लिए निकले और सफलतापूर्वक दोपहर 12 बजे पहुंच गए।
श्री सोनी ने बताया कि रास्ते में उनको झीरमघाटी पडी। जहां पर वे खुद रुके और उन्हें तरबूज का सेवन वहां के आदिवासी लोगों द्वारा करवाया गया और वे उनसे अपनी साइकल चलाने एवं साइकलों से किए गए बहुत सारे जनसेवा को लेकर चर्चा भी किये। श्री सोनी ने बताया कि यह हमारा वहम है कि नक्सली हमें गोली मार देंगे या हमें नुकसान पहुंचाएंगे बल्कि श्री सोनी जी के साथ आदिवासियों ने इतना अच्छा व्यवहार किया जैसे कि वह उनका खुद संस्कारधानी या परिवार हो। श्री सोनी ने सुकमा में श्रीमान कलेक्टर साहब वीनीत नंदावार व आईपीएस सुनील शर्मा जी से मुलाकात की। दोनों बड़े अधिकारियों ने श्री सोनी को गले लगाकर व खाना खिलाकर उसे प्रोत्साहित किया। अपने पर्सनल मोबाईल में सेल्फी ली और श्री सोनी जी की साइकल को दोनों बड़े अधिकारियों ने चलाकर देखा और उस विडियो को सोशल मीडिया में उनके द्वारा डाला गया। दोनों अधिकारियों ने खुद श्री सोनी को सैलुट किया और कहा कि आपके जैसे जाबांज लोगों की देश को सख्त जरुरत है। जल्दी आईपीएस बनकर हमारे पास चले आईए। हम इस दिन का बेसब्री से इंतजार करेंगे। उसके बाद श्री सोनी जी केबीनेट मंत्री माननीय कवासी लखमा जी के बेटे से मुलाकात की व सुकमा नगर निगम के महापौर से मुलाकात की। दोनों ही पदाधिकारियों ने श्री सोनी को अपने कार में बिठाकर सुकमा शहर का भ्रमण करवाया व पुष्प स्वागत करवाया। जैसे ही श्री राम भगवान का अयोध्या में आगमन हुआ था उसी प्रकार श्री सोनी जी के आगमन पर इन दोनों पदाधिकारियों ने उनका स्वागत व सम्मान कराया। रुकने की व्यवस्था कराई। श्री सोनी वहां के वातावरण एवं आदिवासी समाज से मिलकर बहुत कुछ सीखे और अपने परंपरा के प्रति निष्ठा और परंपरा का कैसे आगे बढ़ाएं इन सबके बारे में जानकारी हासिल की और वहां के छत्तीसगढ़ के सबसे बेहतरीन कहे जाने वाले व अद्भुत गौठान का निरीक्षण किया। तत्पश्चात श्री सोनी अपनी साइकिल से सुकमा जिले के कुछ लोकप्रिय पर्यटन एवं जीवन प्रदान करने वाले जल प्रपात भी गए। उसके बाद श्री सोनी जी को माननीय मंत्री कवासी लखमा जी की फोन आया। उनको सोनी जी और उनकी मेहनत इतनी भा गई कि उनको सुकमा से रायपुर अपने बंगले में आमंत्रित कर दिया। फिर क्या था। श्री सोनी जी मात्र 24 घंटे में 480 किलो मीटर की यात्रा सुकमा से रायपुर की साइकिल से ही तय कर गए। श्री सोनी जब रायपुर पहुंचे तो उनका माननीय लखमा जी एवं कार्यकर्ताओं द्वारा तिलक लगाकर एवं ताली बजाकर उनका अभिनंदन एवं भव्य स्वागत किया गया। श्री सोनी को 56 व्यंजनों से नवाजा गया। श्री लखमा जी का दिल जीतने वाले यह पहले व्यक्ति बन गए। लखमा जी ने इनको संस्कारधानी का गौरव कहकर नाम दिया। श्री सोनी से लखमा जी इतने प्रभावित हुए कि कहा तुम आईपीएस जरुर बनोगे मेरा आशीर्वाद है और उनके साथ सेल्फी लेकर उन्हे सम्मान के साथ विदा किया गया और उन्हें कहा कि 51वीं कोशिश जो कि मुख्यमंत्री से मिलने की है उसे मैं पूरा करूंगा। तु निश्चिंत होकर घर जा जैसे ही मुंबर से माननीय मुख्यमंत्री जी आएंगे। श्री सोनी जी उनके मिलने कवासी लखमा जी के साथ जाएंगे। इनकी साइकिल यात्रा सफलतापूर्वक पूर्ण हुई। इन्होंने 6 दिन में 1000 किलो मीटर साइकिल चलाकर नया एवं कई अन्य राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय रिकार्ड में भी अपना नाम दर्ज करवाया। चौका देने वाली बात तो यह है कि श्री सोनी 1000 किलो मीटर जब पूरे किया उसके बाद ही उन्होंने खाना खाया। बांकी वे इस पूरी यात्रा में वे जूस और फल का ही सेवन कर रहे थे। सुकमा के लोंगों के शब्द है साबास यश सोनी। फिर और आना।अपने परिवार एवं नए उद्देश्य के साथ। हम सुकमावासी एवं आदिवासी समाज आपको सदैव याद करेंगे और इंतजार करेंगे।
