० मरीजों के कान की हुई निःशुल्क जांच, दवाइयां देकर श्रवण यंत्र भी बांटे
० सभी आयु वर्ग के लोगों के कान की होगी निःशुल्क स्क्रीनिंग
राजनांदगांव। कर्ण (कान) से संबंधित रोगों पर नियंत्रण करने के लिए विश्व श्रवण दिवस के अवसर पर जिले में विविध आयोजन किए गए। जिले के सभी स्वास्थ्य केंद्रों में जांच शिविर लगाया गया। कर्ण जागरुकता सप्ताह शुरू करने के साथ ही शहरी क्षेत्र में जनजागरुकता के लिए रथ भी निकाला गया है, जिसे मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
लोगों में कान की देखभाल और कान से जुड़ी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाने के उद्देश्य से प्रत्येक वर्ष 3 मार्च को विश्व श्रवण दिवस मनाया जाता है। इस अवसर पर लोगों को कान से संबंधित रोगों के उपचार और बचाव की जानकारी दी जाती है। जिले में यह जागरुकता कार्यक्रम मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मिथिलेश चौधरी के मार्गदर्शन में शुरू किया गया है, जो 10 मार्च तक चलाया जाएगा। विश्व श्रवण दिवस कार्यक्रम की कड़ी में जिला अस्पताल में सात दिन तक कर्ण स्क्रीनिंग की जाएगी, जिसमें विशेषज्ञ चिकित्सक सेवाएं देंगे। जागरुकता रथ के माध्यम से शहरी क्षेत्र में लोगों को कर्ण रोगों के लक्षण तथा इसके उपचार के बारे में जागरुक किया जाएगा। जागरुकता सप्ताह के पहले दिन भी यहां शिविर लगाकर मरीजों के कान की निःशुल्क जांच की गई। इस दौरान हर आयु वर्ग के रोगियों को निःशुल्क चिकित्सीय सलाह एवं दवाइयों के साथ ही आवश्यकता अनुरूप श्रवण यंत्र भी उपलब्ध कराए गए। इसके अलावा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय से जागरुकता रथ रवाना किया गया, जिसे सीएमएचओ डॉ. मिथिलेश चौधरी ने हरी झंडी दिखाई। इस अवसर पर सहायक नोडल अधिकारी डॉ. प्रणय शुक्ला, गैर संचारी रोग प्रकोष्ठ के जिला सलाहकार विकास राठौर व जिला वित्त सलाहकार थामेश वर्मा समेत अन्य उपस्थित थे।
नोडल अधिकारी डॉण् बीएल तुलावी ने बताया-राष्ट्रीय बधिरता रोकथाम एवं नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत कान की समस्याओं के लिए जिला अस्पताल में कर्ण रोगियों की स्क्रीनिंग की जाएगी। साथ ही ऐसे बच्चे जो जन्म से ही बहरेपन का शिकार हैं, उन्हें छत्तीसगढ़ शासन द्वारा संचालित योजना के माध्यम से कॉक्लियर इम्प्लांट की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। स्क्रीनिंग के दौरान मिले गंभीर और अति गंभीर मरीजों के लिए रेफर की व्यवस्था भी की गई है। उनका नियमित रूप से फॉलोअप भी किया जाएगा। जिले में बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राज्य स्तर से ईएनटी नाक, कान व गला रोग विशेषज्ञ तथा ऑडियोलॉजिस्ट यूनिट को कार्यक्रमों की मार्गदर्शिका अनुरूप प्रशिक्षित किया गया है।
इस संबंध में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मिथिलेश चौधरी ने बताया-कान से संबंधित किसी भी समस्या को हल्के में नहीं लेना चाहिए। कान की समस्या होने पर अपने निकटतम प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, जिला अस्पताल या शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों में तत्काल जाकर जांच कराएं। कर्ण जांच की बेहतर सेवाएं मुहैया कराने के लिए राज्य स्तर से स्किल-बेस्ड हैंड्स ऑन ट्रेनिंग-आधुनिक कर्ण जांच के लिए मशीन (बीईआर, मशीन इंडिपेंडेंस ऑडियोमीटर, प्योरटोन ऑडियोमीटर, ओएई मशीन) व दवाइयों की व्यवस्था की गई है।
बहरेपन के कारण
अत्यधिक शोर, हॉर्न, लाउडस्पीकर, तेज आवाज में संगीत, पटाखे, कान में संक्रमण, जैसे मवाद आना कान का दर्द, कान में मैल का अधिक होना दुर्घटना में सर या कान में चोट बचपन की बीमारियां जैसे खसरा (मीजल्स) कनफेड (मंम्प्स) या मस्तिष्क ज्वर (मेनिन्जाईटिस) के कारण बहरेपन की शिकायत हो सकती है।
सुरक्षा एवं बचाव के उपाय
यदि व्यक्ति के कान में कुछ रिसाव हो या कम सुनाई दे रहा है तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें। कान को तेज शोर से बचाएं। गर्भावस्था के दौरान बिना डॉक्टर की सलाह से कोई भी दवा का सेवन न करें।
…लेकिन यह ना करे
कान में नुकीली वस्तु न डालें। गंदे पानी में तैरने से बचें। कान में किसी भी प्रकार का तरल पदार्थ न डालें।
