राजनांदगांव. १० फरवरी २०२२ : दिग्विजय महाविद्यालय के हिंदी विभाग में आयोजित एक विशेष व्याख्यान में आज मुक्तिबोध के काव्यदर्शन पर विमर्श किया गया. प्राचार्य डॉ. के. एल. टांडेकर की अध्यक्षता में आयोजित इस व्याख्यान में विशेष वक्ता कल्याण महाविद्यालय के प्राध्यापक डॉ. अंजन कुमार सहित हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. शंकर मुनि राय, डॉ. बी. एन. जागृत और डॉ. नीलम तिवारी ने अपने विचार रखे.
व्याख्यान के प्रारम्भ में प्राचार्य ने मुक्तिबोध को अंतर्राष्ट्रीय रचनाकार बनने से पहले के जीवन दर्शन का उल्लेख किया और कहा कि ऐसे रचनाकार की कर्मस्थली में सेवा देना हमारा सौभाग्य है.
मुख्य वक्ता डॉ. रंजन ने कहा कि मुक्तिबोध उस अँधेरे के कवि हैं, जो जीवन के उजाले में छुपा हुआ है. इनकी कवितायें आनंद पैदा करने वाली नहीं, पाठक को बेचैन करने वाली है. इससे पूर्व डॉ. शंकर मुनि राय ने राजनांदगाव के साहित्यिक परिदृश्य का उल्लेख करते हुए डॉ. बलदेव प्रसाद मिश्र, पदुमलाल, पुन्नालाल बख्शी और मुक्तिबोध के साहित्यिक दर्शन का उल्लेख किया. इस अवसर पर उपस्थित शोधार्थियों को सम्बोधित करते हुए आपने कहा कि अनुसन्धान एक दृष्टि है. इसके लिए शोधार्थी का चिंतनशील होना जरुरी है.
कार्यक्रम में विभागीय प्राध्यापक डॉ. स्वाति दुबे, डॉ. गायत्री साहू, डॉ. भवानी प्रधान, शोधार्थी एस कुमार, कैलाश कुमार, हेमलाल, शीलाल वर्मा और प्रियंका सहित स्नातकोत्तर हिंदी के विद्यार्थी उपस्थित थे.
