राजनांदगांव। गरीब पात्र परिवारों को सस्ते चावल का लाभ नहीं मिल पा रहा है। नगर निगम में बड़ी संख्या में राशन कार्ड बनाने के आवेदन पड़े हुए हैं। राशन कार्ड बनाने की समय-सीमा भी तय कर दी गई है। इसके बाद भी समय पर राशन कार्ड बनकर नहीं मिल रहा है। जिसके चलते पात्र परिवारों को सस्ते चावल से वंचित होना पड़ रहा है। राशन कार्ड के लिए निगम दफ्तर का चक्कर काट रहे हैं। नाम जोड़ने, नाम कटाने, नये राशन कार्ड बनाने के लिए 30 दिन भी निर्धारित है। फिर भी आवेदकों का समय पर राशन कार्ड नहीं बन रहा है। निगम में 421 से अधिक आवेदन पेडिंग पड़े हुए हैं। विभागीय अफसर भी इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। नगर निगम में थोक में नये राशन कार्ड बनाने, नाम जोड़वाने, विलोपित कराने, त्रुटि सुधरवाने व संशोधित कराने के सैकड़ों आवेदन पड़े हुए हैं।
कोरोना का रो रहे हैं रोना
कोरोना संक्रमण के चलते नगर निगम में लोगों के आवाजाही पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। वहीं निगम के कई कर्मचारी कोविड के चपेट में आ गए थे। निगम के कर्मचारी इसी का बहाना बना रहे हैं। यहीं नहीं राजस्व विभाग के कई कर्मचारियों की ड्यूटी राजस्व वसूली व अन्य कार्यों के लिए लगा दी गई है। जिसके चलते संबंधित विभाग के कर्मचारी समय पर आए आवेदनों पर काम नहीं कर पा रहे हैं। जिसका खामियाजा आवेदनकर्ताओं को भुगतना पड़ रहा है। आवेदनकर्ता रोजाना निगम का चक्कर लगा रहे हैं।
बाजार से महंगे दामों में खरीद रहे
नगर निगम के राजस्व दफ्तर में एपीएल, बीपीएल, अंत्योदय के सैकड़ों आवेदन महीनों से लंबित पड़े हुए हैं। समय पर राशन कार्ड नहीं बनने के कारण आवेदकों को बड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि आवेदन कार्ड नहीं बनने के कारण बाजार से महंगे दामों में चावल व राशन खरीदने को मजबूर हैं। निगम के अफसरों को इसकी जानकारी भी है। इसके बावजूद इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। राजस्व विभाग को नये राशन कार्ड बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। लेकिन राजस्व विभाग के अधिकतर कर्मचारी राजस्व वूसली में लगे रहते हैं। जिसके चलते आवेदनों की समय पर जांच नहीं हो पाती।
सर्वर ने बढ़ाया सिरदर्द
खाद्य विभाग का पोर्टल में तकनीकी खामियां है। आए दिन सर्वर ठप रहता है। सर्वर ने आवेदकों का सिरदर्द बढ़ा दिया है। पोर्टल में तकनीकी खराबी होने के कारण समय पर राशन कार्ड नहीं बन रहा है। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि प्राप्त आवेदनों को खाद्य विभाग के पास पीडीएफ बनाने के लिए भेजा जाता है। लेकिन आए दिन खाद्य विभाग का पोर्टल तकनीकी दिक्कतें रहती हैं। जिसके चलते पीडीएफ बनाने में लेटलतीफी होती है।
