दहेज हत्या के एक मामले में फास्ट ट्रेक कोर्ट में अपर सत्र न्यायाधीश न्यायाधीश अभिषेक शर्मा दहेज हत्या के मामले में मृतिका के पति व दादी सास को 10-10 साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए मात्र छह माह में भी निर्णय सुना दिया।
मामला बीते वर्ष 29 जुलाई का है। हेमलता निषाद (22) निवासी ग्राम भंवरमरा का विवाह 12 जून 2020 को सामाजिक रीति-रिवाज से ग्राम नगपुरा जिला दुर्ग निवासी हेमंत कुमार निषाद पिता. कृष्णा निषाद (22) के साथ संपन्ना हुआ था। 13 जून 2020 को हेमलता की विदाई हुई थी। विवाह के बाद हेमलता 12-13 दिन अपने ससुराल में रही। उसके बाद 29 जून को उसका पति हेमत उसे उसके मायके ग्राम भवरमरा छोड़कर चला गया। हेमलता मायके में रह रही थी।
इस दौरान उसने अपनी मां को बताया कि उसका पति हेमंत उसके कमरे में आता नहीं। बच्चा नहीं चाहिए कहता था और अगर बच्चा हो गया तो वह मेरा बच्चा नहीं है, बोल देगा। खाना बनाना नहीं आता कहकर प्रताड़ित करता था। इसके अलावा हेमलता का पति हेमत और दादी सास सुरतिया बाई भी हेमलता को यह कहकर ताना मारते और प्रताड़ित करते थे कि दहेज कम सामान लायी हो। फ्रिज, मोटर सायकल नहीं लायी हो। टिकावन (दहेज) जितना सोचा था उससे कम लायी हो, कहते हुए अक्सर हेमंत और सुरतिया बाई हेमलता को ताना मारते थे। अपने पति और दादी सास के व्यवहार से हेमलता काफी दुखी व परेशान हो गई थी।
हेमलता को इस बात की जानकारी होने पर कि अब उसका पति उसे लेने कभी नहीं आएंगे तो दो जुलाई 2020 को अपने मायके में जहर (कीटनाशक) का सेवन कर आत्महत्या कर ली। पुलिस चौकी सुरगी द्वारा मर्ग कायम कर मृतिका के शव का पीएम कराया गया। मृतिका के पति और दादी सास के विरूद्ध अपराध घटित करना पाये जाने से उन्हें विधिवत् गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजा गया। संपूर्ण विवेचना उपरांत आरोपीगण के विरुद्ध भारतीय दंड विधान की धारा 304 (बी) 34 के तहत चालान विचारण के लिए न्यायालय के समक्ष पेश किया गया था।
छह माह में ही आ गया निर्णय
दहेज हत्या के गंभीर मामले को न्यायालय ने मात्र छह माह में ही निवारित कर लिया। आरोपी हेमंत कुमार निषाद पिता कृष्णा निषाद व सुरतिया बाई निषाद पति स्व. संतोष निषाद (62) निवासी ग्राम नगपुरा, जिला दुर्ग को भारतीय दंड संहिता की धारा 304-ख सहपठित धारा 34 के तहत् 10-10 वर्ष के सश्रम करावास की सजा से दंडित किये जाने का दंडादेश शुक्रवार को पारित किया गया। न्यायालय के समक्ष मामले में छत्तीसगढ़ राज्य की ओर से अतिरिक्त लोक अभियोजक आदित्य प्रकाश श्रीवास्तव ने पैरवी की।
