आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) की टीम द्वारा हिरासत में लिए गए निलंबित आइपीएस जीपी सिंह के खिलाफ तीन अलग-अलग मामलों में जांच चल रही है। दुर्ग आइजी रहने के दौरान उनके द्वारा समर्पित नक्सली के साथ कथित डील करने की बातें सामने आई थीं। वर्ष 2013 में रायपुर के देवेंद्र नगर इलाके के एक युवक पर हमला और वर्ष 2016 में सामाजिक कार्यकर्ता मनजीत कौर बल से जुड़े मामले में जांच शुरू हुई है।
राज्य सरकार ने तीनों मामले की जांच के लिए तत्कालीन स्पेशल डीजी अशोक जुनेजा, तत्कालीन दुर्ग आइजी विवेकानंद सिन्हा और रायपुर आइजी आनंद छाबड़ा को जांच अधिकारी बनाया था। देवेंद्र नगर में रहने वाले दुर्लभ कुमार अग्रवाल ने शिकायत की थी कि रायपुर के एसपी दफ्तर में तत्कालीन एसपी ओपी पाल और सीपीएस अर्चना झा ने उसके साथ मारपीट की थी। इस केस को बिना जांच के जीपी सिंह ने खत्म कर दिया। इसकी जांच तत्कालीन स्पेशल डीजी अशोक जुनेजा कर रहे हैं।
नक्सली मामले में दुर्ग आइजी कर रहे जांच
वर्ष 2016 में नक्सली पहाड़ सिंह ने आत्मसमर्पण किया था। पहाड़ सिंह से करोड़ों रुपयों का हिसाब-किताब मिला था। आरोप है कि जीपी सिंह ने पहाड़ सिंह के पैसे रखने वाले कारोबारियों को डराया और अवैध तरीके से पैसे बनाए। इस मामले की जांच दुर्ग आइजी को सौंपा गया है। सामाजिक कार्यकर्ता मनजीत कौर बल की शिकायत के अनुसार, जीपी सिंह ने आपराधिक मामलों में आरोपी कमलाकांत तिवारी को बचाने की कोशिश की। इसकी जांच रायपुर रेंज आइजी आनंद छाबड़ा कर रहे हैं।
एक जुलाई 2021 को जीपी के घर पड़ा था छापा
एसीबी और ईओडब्ल्यू की टीम ने एक जुलाई 2021 को जीपी सिंह के रायपुर स्थित सरकारी आवास सहित उनसे जुड़े 15 ठिकानों पर छापा मारा था। करीब 68 घंटे चली कार्रवाई के बाद मिले कागजातों के आधार पर जीपी सिंह के खिलाफ राजद्रोह का केस दर्ज हुआ था। जांच में दस करोड़ से ज्यादा की अघोषित संपत्ति और सोना बरामद किया गया था। जिसकी वे सही जानकारी नहीं दे पाए थे। कारोबारी मित्र प्रीतपाल सिंह चंडोक के घर से 13 लाख रुपये, राजनांदगांव में चार्टर्ड अकाउंटेंट राजेश बाफना के दफ्तर से जीपी सिंह की पत्नी और बेटों के नाम 79 बीमा पालिसी मिली थी।
पुलिस ने 400 पेज का पेश किया चालान
एसीबी और रायपुर पुलिस की टीम ने दस्तावेजों की जांच के बाद 154-ए और 124-ए की धाराओं में मामला दर्ज किया था। पांच जुलाई को जीपी सिंह को निलंबित करने के बाद आठ जुलाई को रायपुर के कोतवाली थाने में पहली एफआइआर दर्ज की गई थी। इसके बाद पुलिस ने कोर्ट में जीपी सिंह के खिलाफ 400 पन्न्े का चालान पेश किया था।
