कांग्रेस पार्टी पंजाब में एक बार फिर एक परिवार से केवल एक को टिकट देगी और इस फैसले से मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी से लेकर कई सीनियर मंत्रियों और नेताओं को झटका लग सकता है। पिछले चुनाव में भी पार्टी ने एक परिवार से एक को ही टिकट दिया था, लेकिन इस बार कैप्टन अमरिंदर सिंह के अलग पार्टी बनाने से यह दबाव बढ़ता जा रहा कि उनकी पार्टी में न जाएं, इसलिए बड़े नेताओं को रोकने के लिए उनके बेटों और भाइयों को भी टिकट दिया जाए। एक परिवार से एक सदस्य को टिकट देने का फैसला नई दिल्ली में हुई स्क्रीनिंग कमेटी में लिया।
बताते हैं कि मीटिंग में अजय माकन ने साफ कर दिया कि हाईकमान के निर्देश हैं कि एक परिवार से एक से ज्यादा टिकट नहीं दिया जाएगा। यही नहीं, यह भी फैसला लिया गया है कि कोई भी विधायक अपनी सीट को बदलकर दूसरी सीट पर नहीं जाएगा। पार्टी के इस फैसले का असर मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी पर होगा जिनके भाई डा. मनोहर सिंह बस्सी पठाना में इन दिनों काफी सक्रिय नजर आ रहे थे।
यही नहीं, उन्होंने हाल ही में खरड़ अस्पताल के एसएमओ के पद से इस्तीफा दे दिया था। इस सीट पर फिलहाल गुरप्रीत सिंह जीपी विधायक हैं जिनके आफिस का बीते कल पार्टी प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू उद्घाटन करके आए हैं। पटियाला सीट चूंकि इस बार कैप्टन अमरिंदर सिंह के जाने की वजह से खाली हुई है उन्हें कड़ी टक्कर देने के लिए पार्टी ने वहां से ब्रह्म मोहिंदरा को खड़ा करने की तैयारी शुरू की है। कैप्टन जैसे सशक्त उम्मीदवार को टक्कर देने के बदले मोहिंदरा अपने बेटे के लिए पटियाला टृू से सीट मांग रहे हैं।
ग्रामीण विकास मंत्री तृप्त राजिंर सिंह बाजवा भी फतेहगढ़ चूडि़यां के अलावा अपने बेटे के लिए बटाला सीट मांग रहे हैं जिस कारण उनका यहां पर अश्विनी सेखड़ी से पेंच फंसा हुआ है। कादियां सीट के विधायक फतेह जंग सिंह बाजवा को उनके भाई व राज्य सभा सदस्य प्रताप सिंह बाजवा ही लड़ाई दे रहे हैं। प्रताप सिंह बाजवा भी इस बार चुनाव मैदान में उतरना चाहते हैं। वह भी बटाला सीट पर चक्कर लगा रहे हैं। कैबिनेट मंत्री राणा गुरजीत के लिए भी यह फैसला मुश्किलों भरा हो सकता है, क्योंकि वह खुद कपूरथला से लड़ते हैं और अपने बेटे के लिए वह सुल्तानपुर लाेधी सीट मांग रहे हैं, जहां से कांग्रेस के विधायक नवतेज सिंह चीमा दो बार लगातार विधायक रह चुके हैं। यहां पर भी सिद्धू ने चीमा का ही साथ दिया हुआ है।
