छत्तीसगढ़ भाजपा आरटीआई सेल ने कहा कि सरकार बनाने से पूर्व घोषणा पत्र में गंगाजल की कसम खाकर शराबबंदी की बात कही थी। वहीं सरकार बनने के बाद छत्तीसगढ़ में 120 नई शराब की दुकानें खोली गई। भाजपा आरटीआई सेल के प्रदेश संयोजक डा. विजय शंकर मिश्रा ने कांग्रेस सरकार की वादा खिलाफी पर ज़ोरदार हमला बोला।
उन्होंने कहा पूर्व की तत्कालीन भाजपा की सरकार ने वर्ष 2016 से ही नशे को हतोत्साहित करने और चरणबद्ध शराबबंदी के साथ अवैध शराब पर मजबूत नियंत्रण के लिए नई शराब नीति बनाकर शराब बिक्री का अधिकार ठेकेदारों से छीनकर उसका सरकारीकरण कर दिया था। इस नियम के तहत 10 हज़ार से कम आबादी वाले नगर पंचायत सहित ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित 100 से अधिक शराब दुकानों को तत्काल प्रभाव से बंद करना सुनिश्चित कराया था।
इसके बाद वर्ष 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने राजमार्ग, राष्ट्रीय राजमार्ग, मुख्य हाइवे के किनारे शहर के बीच घनी आबादी के पास के शराब दुकानों को आबादी क्षेत्र एवं सड़क से दो किलोमीटर दूर करने का फैसला दिया था। जिससे शराब की बिक्री घटी थी, साथ ही अवैध शराब की बिक्री पूरी तरह बंद हो चुकी थी। दूसरे राज्य की शराब पकड़ने फ्लाइंग स्काड का गठन करने के कारण बाहर की शराब के एक भी केस तत्कालीन सरकार के राज में नहीं होते थे।
सरकार बदलने के बाद खुली 22 प्रीमियम दुकानें
2018 में सरकार बदलने के बाद शराबबंदी का दावा करने वाले भूपेश बघेल की सरकार ने छत्तीसगढ़ के राजधानी सहित प्रमुख 4 बड़े जिलो में 22 प्रीमियम वाइन शाप खोलने के साथ 93 देशी मदिरा दुकान को अपग्रेड कर उसे (कम्पोजिट) अर्थात देशी-विदेशी मदिरा दुकान संयुक्त एक स्थान विशेष में खोलना सुनिश्चित कराया। तीन होम डिलवरी सेंटर बनाए गए। कुल 120 नई शराब दुकान पिछले और इस वित्तीय वर्ष में खोले गए। डा. विजय शंकर मिश्रा ने बताया कि भाजपा आरटीआई सेल के जयराम कुमार दुबे द्वारा सूचना का अधिकार के तहत प्राप्त जानकारी से यह साबित होता है कि आबकारी विभाग अब शराब की बिक्री बढ़ाने में जुटा है।
कमीशन के फेर मे घटिया शराब की बिक्री
लगातार मिल रही शिकायतों से यह पता चलता है कि आबकारी विभाग शराब की दुकान से चोरी उसकी क्वालिटी और उनके मिलावट की शिकायतों, ओवररेटिंग और अवैध शराब की करोड़ों की पकड़ी जाने वाली खेप पर बिल्कुल भी गंभीर नहीं दिखती है।
