भारत की Harnaaz Kaur Sandhu ने Miss Universe का खिताब अपने नाम कर लिया है। 21 साल बाद किसी भारतीय सुंदरी ने यह खिताब अपने नाम किया है। इससे पहले सन 2000 में लारा दत्ता और सन 1994 में सुष्मिता सेन ने यह खिताब अपने नाम किया था। जिस सवाल के जवाब ने संधू को जीत दिलाई वह सवाल है – “दबाव का सामना कर रहीं महिलाओं को क्या सलाह देंगी?” इसके जवाब में संधू ने कहा कि “मैंने देखा कि आज युवा जिस बात का सबसे ज्यादा दबाव ले रहा है, वो है खुद पर विश्वास करना। हमें पता होना चाहिए की हम अलग हैं और हमारा बाकियों से अलग होना ही खूबी है और यही चीज हमारे आत्मविश्वास को बढ़ाती है। युवाओं को दूसरों से तुलना करना बंद कर देना चाहिए। मैंने खुद पर विश्वास किया है और यही वजह है कि आज मैं यहां हूं।
Harnaaz Kaur Sandhu की तरह देश की कई महिलाएं अपने-अपने क्षेत्र में बेहतरीन काम कर रही हैं और भारत का नाम रोशन कर रही हैं। इसी साल Tokyo Olympics में भारतीय महिला हॉकी टीम ने पहली बार सेमीफाइनल में पहुंचकर इतिहास रच दिया था। भारतीय महिला हॉकी टीम ने शानदार खेल दिखाते हुए ऑस्ट्रेलिया जैसी बड़ी टीम को हरा दिया था, हालांकि सेमीफाइनल में वह ब्रिटेन से हार गई थी। लेकिन ओलंपिक जैसे बड़े खेल प्रतियोगिता में सेमीफाइनल तक पहुंचना भी बहुत बड़ी बात होती है।
इसी साल एक और महिला ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपनी सूझबूझ का शानदार प्रदर्शन करते हुए पाकिस्तान को करारा जवाब दिया था। वह महिला थी संयुक्त राष्ट्र महासभा में देश की प्रथम सचिव स्नेहा दुबे। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान द्वारा कश्मीर का मुद्दा छेड़ा गया, तो स्नेहा दुबे ने राइट टू रिप्लाई का इस्तेमाल करते हुए उन्हें करारा जवाब दिया था। इन महिलाओं ने दिखा दिया कि अगर आपके अंदर खुद में विश्वास है, तो आप बुलंदियों को छू सकती हैं।
विश्व स्तर पर देश की इन महिलाओं के योगदान को देखते हुए उन लड़कियों के सपनों को बल मिला है, जो जीवन में कुछ करना चाहती हैं और नाम कमाना चाहती हैं। हालांकि, अभी भी कुछ सामाजिक चुनौतियां हैं, जो इन्हें आगे बढ़ने से रोक रही हैं। परिवार और समाज में कौन सी ऐसी चुनौतियां हैं, जो लड़कियों को अपने सपनों को पूरा करने से रोक रही हैं? आप बताइए और इस संबंध में Koo App पर अपने विचार जरूर साझा करें।
