कोड़का महामाया मंदिर छुईखदान रियासत की कुलदेवी मां भी है। कोड़का महामाया मंदिर छुईखदान से पूर्व दिशा पर पांच किलोमीटर दूरी पर स्थित है। उदयपुर से पश्चिम दिशा में सात किलोमीटर की दूरी पर है। अभी वर्तमान में सिद्ध शक्ति पीठ मां महामाया देवी के नाम में प्रसिद्ध मंदिर है। छुईखदान रियासत के दसवें वंशज व राजा गिरिराज किशोर दास ने बताया कि माता महामाया मंदिर को कोड़का में सन् 1717 में स्थापित किया गया था, इस हिसाब से माता महामाया मंदिर का इतिहास 304 साल पुराना है।
रायगढ़, इलाहाबाद, ओडिशा, काशी, बनारस सहित कई स्थानों से आते हैं भक्त: माता के दरबार में चैत्र नवरात्रि में 314 ज्योति कलश स्थापित किया गया था। वहीं इस वर्ष भी क्वांर नवरात्रि में 327 ज्योति कलश स्थापित किया गया है। यहां छत्तीसगढ़ के साथ-साथ पूरे भारतवर्ष में माता महामाया आस्था का केंद्र है। कोड़का महामाया मंदिर में रायगढ़, इलाहाबाद, ओडिसा, काशी, बनारस, नागपुर, भंडारा, दुर्ग-भिलाई, रायपुर, बिलासपुर, कोरबा, कवर्धा, छुईखदान, खैरागढ़ के साथ-साथ क्षेत्र के सैकड़ों गांव से श्रद्धालु के द्वारा ज्योति कलश स्थापित किया जाता है।
ग्राम पटेल संदीप वैष्णव ने बताया कि प्रति वर्ष की भांति इस वर्ष भी समस्त क्षेत्रवासी मां महामाया ट्रस्ट समिति व तुलसी मानस प्रतिष्ठान के तत्वावधान में मानस सम्मेलन का आयोजन किया गया है। मानस सम्मेलन के अंतर्गत सांसद संतोष पांडे, विधायक देवव्रत सिंह, पूर्व विधायक गिरवर जंघेल, जिला पंचायत उपाध्यक्ष विक्रांत सिंह अतिथि के रुप में उपस्थित रहेंगे। सम्मेलन के मंच में छुईखदान ब्लॉक के प्रत्येक मानस मंडली को आमंत्रित किया गया है। प्रत्येक मानस मंडली के लिए भोजन प्रसादी का व्यवस्था की गई है, इसके पूर्व भी दो बार रुद्र महायज्ञ, एक बार देवी सतचंडी महायज्ञ आयोजन किया जा चुका है।
जानिए, मंदिर का इतिहास
चित्तौड़ से राणा रूप सिंह अपने भतीजे ब्रह्मा सिंह के साथ छुईखदान जमीदारी में पहुंचे। जब छुईखदान परपोड़ी जमीदारी के मध्य युद्ध हुआ तो ब्रह्मा सिंह वीरगति प्राप्त किए। छुईखदान रियासत का मूल केंद्र बिंदु कोडका ही था क्योंकि कोडका परपोड़ी के निकट है। शत्रुता और संघर्ष की स्थिति निर्मित होती रहती थी, इसलिए कोडका जमीदारी वर्तमान छुईखदान रियासत के तीसरे प्रमुख महंत तुलसीदास ने कोड़का छोड़कर अपने सुरक्षित भविष्य के लिए छुईखदान को अपना निवास स्थान बना लिया था। अपने भतीजे के मौत के पश्चात राणा रूप सिंह माता महामाया को ग्राम कोड़का में विधिवत स्थापित किए।
