देश में अब छत्तीसगढ़ गोबर से बिजली बनाने वाला राज्य बनने जा रहा है। राज्य के सीएम भूपेश बघेल ने शनिवार को बेमेतरा जिला मुख्यालय के बेसिक स्कूल ग्राउंड में आयोजित किसान सम्मेलन के दौरान राज्य के गौठानों में गोबर से बिजली उत्पादन की परियोजना का वर्चुअल शुभारंभ किया। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के ग्राम सुराज की परिकल्पना को साकार करते हुए गांवों को स्वावलंबी बनाने में जुटी है। अब छत्तीसगढ़ के गांव गोबर से विद्युत उत्पादन के मामले में स्वावलंबी होंगे।
बिजली उत्पादन से मिलेगा दोगुना लाभ
मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि एक समय था जब विद्युत उत्पादन का काम सरकार और बड़े उद्योगपति किया करते थे। अब हमारे राज्य में गांव के ग्रामीण टेटकू, बैशाखू, सुखमती, सुकवारा भी बिजली बनाएंगे और बेचेंगे। गोबर खरीदी का मजाक उड़ाने वाले लोग अब इसकी महत्ता को देख लें। मुख्यमंत्री ने बेमेतरा जिले के राखी गौठान, दुर्ग जिले के सिकोला तथा रायपुर जिले के बनचरौदा में गोबर से विद्युत उत्पादन के शुभारंभ अवसर पर वहां मौजूद स्व-सहायता समूह की महिलाओं एवं गौठान समितियों के सदस्यों से उनकी आयमूलक गतिविधियों के बारे में चर्चा करते हुए उन्हें अब गोबर से विद्युत उत्पादन की यूनिट शुरू होने पर बधाई और शुभकामनाएं दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि गोबर से वर्मी कम्पोस्ट के उत्पादन से जितना लाभ महिला समूहों को हो रहा है। बिजली उत्पादन शुरू होने से उन्हें दोगुना लाभ मिलने लगेगा।
महिलाएं गोबर से बिजली बनाएंगी और बेचेंगी
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य के सभी गौठानों में गोबर की बिजली उत्पादन शुरू किया जाएगा। समूह की महिलाएं गोबर से बिजली बनाएंगी और बेचेंगी। उनकी बिजली सरकार खरीदेगी। गौठानों में स्थापित रूरल इंडस्ट्रियल पार्क में विभिन्न प्रकार के उत्पादों को तैयार करने के लिए लगी मशीनें भी गोबर की बिजली से चलेंगी। गौठान अब बिजली के मामले में स्वावलंबी होंगे। गोबर से सस्ती बिजली उत्पादन होने के साथ-साथ जैविक खाद का भी उत्पादन होगा। इससे गौठान समितियों और महिला स्व-सहायता समूहों को दोहरा लाभ होगा। गौरतलब है कि सुराजी गांव योजना के तहत छत्तीसगढ़ राज्य के लगभग छह हजार गांवों में गौठानों का निर्माण कराकर उन्हें रूरल इंडस्ट्रियल पार्क के रूप में विकसित किया गया है, यहां गोधन न्याय योजना के तहत दो रुपये किलो में गोबर की खरीदी कर बड़े पैमाने पर जैविक खाद का उत्पादन एवं अन्य आयमूलक गतिविधियां समूह की महिलाओं द्वारा संचालित की जा रही है।
