पेंड्री स्थित बिल्डिंग में मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल को शिफ्ट हुए एक माह हो गया है पर यहां स्वास्थ्य व्यवस्था पटरी पर नहीं आ पाई है। नॉर्म्स के हिसाब से यहां गंभीर केसेस को हैँडल करना है पर विडंबना है कि इस हॉस्पिटल से रोज पांच से छह केस रेफर किए जा रहे हैं। यहां गायनिक डिपार्ट की सबसे बेकार स्थिति है।
दूरदराज से डिलीवरी के लिए आने वाली गर्भवतियों को डॉक्टरों की कमी बताकर सीधे रेफर कर दिया जा रहा है। इसे लेकर रोज विवाद की स्थिति बन रही है। इधर स्टॉफ की बढ़ोतरी नहीं होने से वर्क लोड के चलते डॉक्टर नौकरी छोड़कर प्राइवेट संस्थानों में ज्वॉइनिंग दे रहे हैं। इस वजह से भी व्यवस्था बिगड़ती जा रही है। अस्पताल की शिफ्टिंग के पहले अफसरेां ने दावा किया था कि पेंड्री हॉस्पिटल में मरीजों को इलाज की बेहतर सुविधा मिलेगी पर यहां तो मरीजों को रेफर की पर्ची थमा दी जा रही है।
यही वजह है कि ओपीडी संख्या में बढ़ोतरी नहीं हो रही। इतना बड़ा अस्पताल होने के बाद भी ढाई से 300 के बीच ही ओपीडी हो रही है जबकि मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल के नॉर्म्स के हिसाब से यहां रोज 700 से 800 मरीजों की ओपीडी होनी चाहिए। बसंतपुर अस्पताल में रोज इतनी ओपीडी हो रही थी पर पेंड्री में जाने के बाद स्थिति बिगड़ गई है। उल्लेखनीय है कि कोरोनाकाल के दौरान लोगों की आर्थिक स्थिति खस्ताहाल है। ऐसे में दूरदराज के गांवों से यहां पहुंचे लोगों को रेफर कर देने से उन्हें आर्थिक परेशानी हो रही है।
इसलिए भी हो रही दिक्कत
पेंड्री हॉस्पिटल में सीटी स्कैन से लेकर अन्य जांच संबंधित मशीनों का अभाव है। यहां तक डिजिटल एक्स-रे के लिए भी भटकना पड़ रहा है। सीटी स्कैन कराने निजी में जाना पड़ता है जो महंगा सािबत हो रहा। मरीजों को सीटी स्कैन के लिए जिला अस्पताल भेज रहे हैं पर यहां मशीन खराब पड़ी है। स्कैन हो भी जाए तो रिपोर्ट को अपडेट करने के लिए रेडियोलॉजिस्ट नहीं है।
3 से 4 सिजेरियन डिलीवरी
मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में 24 घंटे में लगभग 10 सिजेरियन डिलीवरी करनी है पर गायनिक एक्सपर्ट डॉक्टरों की कमी के चलते 3 से 4 केस ही निपटाए जा रहे हैं। प्रसव से जुड़े अन्य गंभीर केस को रेफर कर दे रहे हैं जो गरीब तबके के लिए भारी पड़ रहा है। लोग रेफर की पर्ची देखपरेशान हो जा रहे हैं। यहां सहायक प्राध्यापक 6 पोस्ट खाली हैं।
डीएमई गंभीर नहीं, तीन डॉक्टर की मांग की गई
हाल ही में पीएससी से डॉक्टरों का चयन हुआ है। गायनिक डिपार्टमेंट की ओर से इन्ही में से तीन डॉक्टरों की लगातार मांग की जा रही है। बावजूद डीएमई की ओर से गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। जबकि यहां पदस्थ एक डॉक्टर ने इस्तीफा सौंप दिया है। इसके चलते गायनिक में एचओडी के अलावा सिजेरियन डिलीवरी करने एक भी एक्सपर्ट नहीं है। इस वजह से सारे केसेस हैंडल नहीं किए जा रहे।
सांसद पांडेय को बताई गई है यहां की खामियां
सांसद संतोष पांडे ने गुरुवार को पेंड्री हॉस्पिटल का निरीक्षण किया। इस दौरान सांसद ने वार्डों में पहंुचकर मरीजों से बातचीत की। सांसद को बताया कि यहां गायनिक डिपार्ट में डॉक्टरों की कमी है वर्क लोड बढ़ा है। सांसद ने कमियों को दूर करने आश्वासन दिया। सांसद ने कहा कि इस अस्पताल को डव्ल्प करना है। सहायक अधीक्षक डॉ. सीएस मोहबे ने बताया कि डॉक्टरों की कमी है। सांसद ने उच्च स्तर पर पहल करने की बात कही है।
केस-1. छुईखदान निवासी राकेश भिमटे ने बताया कि गर्भवती पत्नी को प्रसव के लिए मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल लेकर आए थे पर डॉक्टरों ने रेफर कर दिया। बताया कि यहां स्टाफ की कमी है। इसलिए रायपुर जाना पड़ रहा है।
केस-2. साल्हेवारा निवासी ईश्वर साहू ने बताया कि पेट में दर्द होने पर 10 साल के बालक को लेकर अस्पताल पहंुचे थे। यहां सीटी स्कैन नहीं होने की वजह से प्राइवेट में जांच करानी पड़ी। साढ़े 3 हजार रुपए देने पड़ गए।
केस-3. शहर के रामनगर निवासी विरेन्द्र तरेकार ने बताया कि पत्नी की पहली भी सिजेरियन डिलीवरी हुई है। अस्पताल पहंुचने पर डॉक्टरों ने यह कहकर लौटा दिया कि अभी यहां सीमित केस ही ले रहे हैं। मजबूरी में दूसरी जगह जाना पड़ा।
