राजनांदगांव । न्यायालय में लंबे समय से चल रहे प्रकरणों का पलभर में निपटरा हो गया। शनिवार को नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया गया। लोक अदालत में 15375 प्रकरणों का निराकरण किया गया। लंबे समय से चल रहे प्रकरणों का निराकरण के लिए 39 खंडपीठ गठित की गई थी। खंडपीठ ने मामलों को गंभीरता से देखते हुए मामलों का सुलह कराया। थोक में लंबित मामलों का निराकरण होने के बाद न्यायालय का बोझ कम हो गया। सबसे अधिक बीमा व बिजली से संबंधित मामलों का निराकरण किया गया। वहीं लाकडाउन के दौरान नियमों की अनदेखी करने वाले प्रकरणों का भी निराकरण किया गया। नेशनल लोक अदालत में लंबे समय से चल रहे प्रकरणों का निकाकरण के लिए प्रभावित पक्षकारों ने जागरुकता का परिचय दिया। जिला न्यायालय राजनांदगांव के अंतर्गत जिला विधिक सेवा प्राधिकरण राजनांदगांव द्वारा नेशनल लोक अदालत के लिए जिला न्यायालय राजनांदगांव, तहसील न्यायालय-खैरागढ़, ड़ोंगरगढ़, अंबागढ़ चौकी, छुईखदान एवं राजस्व न्यायालय में 39 खंडपीठों का गठन किया गया था।
0 बरसो पुराने मामले मिनटों में सुलझे
लोक अदालत में करीब 18177 मामले पंजीकृत थे। जिसमें 15375 प्रकरणों का मौके पर निराकरण किया। कई प्रकरण ऐसे थे, जो बरसो से न्यायालय में चल रहे थे। नेशनल लोक अदालत में सबसे अधिक मोटर दुर्घटना दावा प्रकरण, बैंक रिकवरी प्रकरण, सिविल प्रकरण, निष्पादन प्रकरण, विद्युत संबंधी मामलों, पारिवारिक विवाद, बिजली कंपनी विभाग, दूरसंचार विभाग, नगरपालिका परिषद में वसूली संबंधी लंबित प्रकरणों का निराकरण किया गया। बरसो पुराने मामले मिनटों में सुलझने के बाद पक्षकारों ने राहत की सांस ली।
घरों तक पहुंचा लोक अदालत
कोरोना संक्रमण को देखते हुए इस बार घरों से वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिए प्रकरणों का निराकरण करने की सुविधा दी गई थी। एक पारिवारिक भूमि विवाद से दो परिवार के सदस्यों के बीच तनाव पैदा हो रहा था। यह मामला प्री लिटिगेशन चरण में था और इसे लोक अदालत की राजनांदगांव खंडपीठ में भेज दिया गया। लगभग पांच वर्ष बाद न्यायालय के द्वारा दी गई समझाईश से उभयपक्ष के मध्य आपसी राजीनामा नेशनल लोक अदालत में संपन्ना हुआ। वैवाहिक विवादों से संबंधित मामलों को भी राष्ट्रीय लोक अदालतों में सफलतापूर्वक निपटाया गया। ऐसे ही एक मामले में एक पति और पत्नी, वैवाहिक विवाद से गुर रहे थे, उनके इस मामले का भी उक्त अदालत में निपटान किया गया। पति ने संवैधानिक अधिकारों की बहाली के लिए एक मूल वाद दायर किया था। यह मामला राष्ट्रीय लोक अदालत में सुनवाई के बाद पति-पत्नी के बीच इस मामले का सौहार्दपूर्ण रूप से निपटारा किया गया। परिवार में संपत्ति को लेकर दोनो भाईयों में गली-गलौच तथा मारपीट हो गई थी। न्यायाधीश द्वारा सलाह-समझाइश देकर उभयपक्ष के मध्य आपसी राजीनामा नेशनल लोक अदालत में संपन्ना हुआ।
