कमजोर बारिश से अब जलाशयों का गला भी सूख रहा है। ये हालात मौजूदा जलभराव की स्थिति से बन रही है। जिले के सात प्रमुख जलाशयों से पेयजल और सिंचाई के लिए पानी मिलता है। लेकिन वर्तमान में वाटर स्टोरेज की जो स्थिति है, वह चिंता बढ़ाने वाली है।
जिले के सात प्रमुख जलाशयों में से 4 में 50 फीसदी से भी कम जलभराव है। जबकि बीते साल इसी तारीख में इन जलाशयों में लबालब पानी था। सबसे बुरी स्थिति मटियामोती जलाशय का है, जिसमें अगस्त 2020 में 100 फीसदी जलभराव था, लेकिन इस बार केवल 15 फीसदी पानी ही मौजूद है। ऐसी ही स्थिति दूसरे जलाशयों की भी है। इसके चलते बारिश के सीजन में ही इस बार सभी जलाशयों के गेट बंद कर दिए गए है। जल्द ही अगर अच्छी बारिश नहीं हुई तो इस बार सिंचाई के साथ-साथ निस्तारी और पेयजल को लेकर भी बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।
सात ब्लॉकों में सूखे की बन रही स्थिति
हर साल अगस्त में सभी जलाशयों से पानी छोड़ते थे। बारिश को लेकर जिलेभर में बुरी स्थिति है। मोहला और मानपुर को छोड़कर शेष सभी ब्लाकों में बारिश काफी कमजोर रही है। हाल में हुई कुछ बारिश से राहत तो जरूर मिली है, लेकिन यह स्थिति को सुधारने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। ऐसे में जिले के 7 ब्लाकों में सूखे की स्थिति बन रही है। इन हिस्सों में किसान अब सूखा घोषित करने की मांग करने लगे हैं।
सिस्टम नहीं बन रहा, करना होगा इंतजार
मौसम विज्ञानी एचपी चंद्रा ने बताया कि फिलहाल मजबूत बारिश का सिस्टम नहीं बन रहा है। इसके लिए कुछ दिनों तक और इंतजार करना पड़ सकता है। वहीं जिले में अब तक हुई ज्यादातर बारिश भी खंड वर्षा के रुप में हुई है। याने पूरे जिले में एक साथ मानसून मेहरबान नहीं हो सका है। सावन के सूखे बीतने के बाद भादो का पहला पखवाड़ा भी बीतने को आ गया है। उम्मीद के मुताबिक बारिश नहीं हुई है।
फसल की सिंचाई के लिए पानी देना मुश्किल, निस्तारी की समस्या भी
जिले के इन सात प्रमुख जलाशयों से सिंचाई के लिए पानी दिया जाता है। लेकिन इस बार की स्थिति को देखते हुए ऐसा संभव नहीं लग रहा है। जल्द ही अच्छी बारिश नहीं हुई और जलाशयों में भराव नहीं बढ़ा तो सिंचाई के लिए नहरों में भी पानी नहीं छोड़ा जा सकेगा। इसके बाद बड़ा संकट निस्तारी और पेयजल को लेकर आएगा। इन्हीं जलाशयों से जिले के कई छोटे तालाब, स्टापडेम को निस्तारी के लिए भरा जाता है। वहीं शहर को भी मटियामोती और मोंगरा से ही पीने का पानी मिलता है।
अब तक औसत से 25% कम बारिश हुई, छुरिया क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित
जिले में पहले जून से अब तक 598.7 मिमी. बारिश दर्ज की गई है। जो इन दिनों के बीते दस साल के औसत बारिश की तुलना में 25 फीसदी कम है। वहीं ब्लाकों की स्थिति पर नजर डालें तो सबसे अधिक मानपुर में 919.6 फीसदी बारिश दर्ज हुई है, वहीं सबसे कमजोर स्थिति छुरिया में है, जहां अब तक केवल 441.3 मिमी. ही बारिश दर्ज हुई है। छुरिया में अब तक हुई बारिश अपने इन दिनों के औसत बारिश से 40 फीसदी कम है। सावन के बाद अब भादो में भी बारिश नहीं हो रही है।
