जिले के कई गांवों में भूजल स्तर तेजी से नीचे जा रहा है। इस वजह से गर्मी के दिनों में इन गांवों में पानी की बेहद किल्लत रहती है। इस संकट से उबारने के लिए जल जीवन मिशन के तहत पीएचई ने मोंगरा बैराज से ऐसे 330 गांवों में पानी पहंुचाने का प्लान किया है जो कि ड्राई जोन के अंतर्गत आते हैं। मोंगरा बैराज के अफसरों ने इसके लिए 12 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी देने सहमति भी दे दी है। इतनी बड़ी संख्या में गांवोें तक पानी पहंुचाने का यह जिले का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट होगा।
इस प्रोेजेक्ट को पूरा करने में 300 करोड़ से ज्यादा राशि खर्च होगी। प्रोजेक्ट में केन्द्र और राज्य सरकार की ओर से आधा-आधा फंड दिया जाएगा। पीएचई की ओर से सर्वे कर लिया गया है। अंबागढ़ चौकी क्षेत्र के पीपरखार में जिले का सबसे बड़ा ट्रीटमेंट प्लांट बनेगा। यहीं से चिन्हांकित गांवों के लिए पानी की सप्लाई होगी। इस प्रोजेक्ट का नाम मोंगरा समूह जल प्रदाय योजना रखा गया है।
शुरुआत में बनाए गए थे 10 प्रोजेक्ट
शुरुआत में 10 समूह जल प्रदाय योजना का प्रोजेक्ट बनाया गया था पर इसमें लागत राशि अधिक आने और प्रोजेक्ट पूरा करने में समय ज्यादा लगने की वजह से 6 प्रोजेक्ट को एक साथ जोड़ दिया गया है। चिन्हांकित किए गए प्रत्येक गांव में टंकी बनेगी। वहीं हर घर तक पानी पहंुचाने के लिए पाइप लाइन का विस्तार किया जाएगा। इसका भी सर्वे कर लिया गया है। सर्वे में यह भी देखा गया है कि जहां पर नल-जल योजना की पुरानी टंकी है, वहां पाइप को कनेक्ट कर पानी दिया जाएगा। यहां पर नई टंकी नहीं बनेगी।
औंधी क्षेत्र में नवागढ़ जलाशय से देंगे पानी
इधर औंधी क्षेत्र के नवागढ़ जलाशय से लगभग 69 गांवों को पानी देने का प्लान बनाया गया है। इस जलाशय के समीप ही ट्रीटमेंट प्लांट होगा। यहां से जंगल के भीतरी गांवों तक पानी पहंुचाया जाएगा। दरअसल इस क्षेत्र में भूजल स्रोत से आर्सेनिक युक्त पानी आने की शिकायत है। इससे राहत देने यह प्रोजेक्ट बनाया गया है। माथलडबरी क्षेत्र में सूखानाला बैराज से पानी दिया जाएगा। छुईखदान ब्लॉक के बूढ़ानभाठ और डोंगरगांव क्षेत्र के एलबी नगर में भी समूह जल प्रदाय योजना पर काम होगा।
इसलिए यह जरूरी
पीएचई के अफसरों ने बताया कि जिले के कुछ गांवों में बारहों माह पानी की किल्लत रहती है। यहां का भूजल स्तर डाउन होने की वजह से हैंडपंप सहित अन्य स्रोत से पानी देना मुश्किल हो जाता है। गर्मी के दिनों में इन गांवों से पानी को लेकर लगातार शिकायतें आती हैं। गांवों में नल-जल योजना संचालित है पर भूजल स्तर डाउन होने से इसके माध्यम से जलापूर्ति नहीं हो पाती। इसलिए पीएचई ने यह प्रोजेक्ट तैयार किया गया है।
स्वीकृति का इंतजार
पीएचई के ईई एसएन पांडे ने बताया कि कलेक्टर जल जीवन मिशन अध्यक्ष हैं। उनके निर्देशन में इस प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं। इस प्रोजेक्ट को जल्द राज्य शासन को स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा। इसके बाद काम शुरू करेंगे। दो साल के भीतर प्रोजेक्ट पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। पांडे ने बताया कि जल संसाधन विभाग की ओर से पानी देने की सहमति दी गई है।
